कर्ज माफी के मुद्दे पर नीति आयोग ने कहा कि ऐसे कदम से सिर्फ कुछ किसानों की सहायता होती है और यह कृषि संकट को कम करने का कोई समाधान नहीं है। नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि यह कदम समाधान नहीं बल्कि एक अस्थायी निदान है। वहीं आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने कुमार का समर्थन करते हुए कहा कि गरीब राज्यों में महज 10-15 फीसदी किसानों को ही कर्ज माफी से फायदा हुआ है, ऐसे राज्यों में कुछ किसानों को संस्थागत कर्ज मिलता है। वहीं कई राज्यों में 25 फीसदी से भी कम किसान संस्थागत कर्ज का लाभ उठा पाते हैं।
श्रम क्षेत्र में चौतरफा सुधार से बनेगी बात
दस्तावेज में श्रम सुधारों को पूरा करने, महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी लागू करने, रोजगार आंकड़ों के संग्रह में सुधार तथा सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया है। आयोग ने प्रोत्साहन, संगठित रूप देने के लिए औद्योगिक संबंधों को आसान बनाने पर बल दिया और कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी बेहतर गतिविधियों के अनुरूप नौकरी से हटाने पर मुआवजा (सेवरेंस पे) बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही आयोग ने विवादों को निष्पक्ष और कम लागत पर निपटाने के लिए श्रम विवाद समाधान प्रणाली में भी सुधार लाने पर जोर दिया।
स्कूलों में आए वित्तीय साक्षरता पाठ
नीति आयोग ने वित्तीय समावेश को प्रोत्साहन देने के लिए बैंकिंग कोरेस्पॉन्डेंट को बेहतर भुगतान, पेपरलेस बैंकिंग को बढ़ावा देने के साथ स्कूल पाठ्यक्रम में वित्तीय साक्षरता से जुड़े अध्यायों को जोड़ने के लिए कहा। साथ ही निम्न आय वर्ग व छोटे अनौपचारिक कारोबारों के बीच वित्तीय साक्षरता की कमी, बैंकिंग सेवाओं की ऊंची लागत के साथ बाजार में प्रवेश के लिए व उत्पादों पर अत्यधिक नियामक आवश्यकताएं भारत के वित्तीय समावेश के लिए बड़ी बाधाएं हैं। सरकार ने वित्तीय समावेश को बढ़ाने व गरीबों को वित्तीय सुरक्षा मुहैया कराने के लिए तमाम स्कीम लांच की हैं।