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Bullet Train: इस राज्य के कारण अटक गया बुलेट ट्रेन का काम, अभी पूरा होने के लिए करना होगा इतना इंतजार

Tue, 25 Apr 2023 04:58 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत की पहली मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना (एमएएचएसआर) या बुलेट ट्रेन की अनुमानित लागत लगभग 1 लाख 8,000 करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट का अगस्त 2026 तक सूरत-बिलिमोरा (63 किमी) के बीच ट्रायल रन के लिए लक्षित किया गया है...
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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए गुजरात के आनंद में बने टनल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। 31 मार्च तक इस प्रोजेक्ट में महज 30.15 फीसदी काम हुआ है। जानकारी के अनुसार, गुजरात की ओर 35.23 फीसदी काम हो चुका है, जबकि महाराष्ट्र की ओर तस्वीर निराशाजनक है। अभी मात्र 19.65 फीसदी काम हुआ है। परियोजना पर लगभग 56.34 फीसदी सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है। अब तक 272.89 किमी का काम किया गया है। रेल मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि 170.56 किमी पर घाट का काम किया गया है, लेकिन अब तक 45.40 किमी गर्डर्स लॉन्च किए गए हैं।

भारत की पहली मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना (एमएएचएसआर) या बुलेट ट्रेन की अनुमानित लागत लगभग 1 लाख 8,000 करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट का अगस्त 2026 तक सूरत-बिलिमोरा (63 किमी) के बीच ट्रायल रन के लिए लक्षित किया गया है। पूरे 508 किमी लंबे मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में महाराष्ट्र में 156 किमी और गुजरात में 352 किमी शामिल हैं। इसके 2027 तक पूरी तरह चालू होने की संभावना है।

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉपोर्रेशन लिमिटेड के अनुसार (एनएचएसआरसीएल), बुलेट ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलेगी और मुंबई-अहमदाबाद के बीच की पूरी दूरी को केवल 127 मिनट में तय करेगी। एमएएचएसआर में वायडक्ट्स (460 किमी) और पुल (9.22 किमी), सुरंग (25.87 किमी), तटबंधों/कटिंग (12.9 किमी) के माध्यम से 92 फीसदी हाई-स्पीड एलिवेटेड रेलवे ट्रैक शामिल हैं।

उत्तर की ओर मुंबई-ठाणे के बीच पर्यावरण-संवेदनशील ठाणे क्रीक से गुजरने वाला रेल गलियारा एक प्रमुख आकर्षण होगा। इसमें ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य (टीसीएफएस) शामिल है, जिसे अगस्त 2022 में रामसर साइट के रूप में नामित किया गया था। टीसीएफएस स्थान पर राजहंस और आसपास के समृद्ध मैंग्रोव में अन्य वन्यजीवों को परेशानी से बचाने के लिए, एमएएचएसआर कॉरिडोर इस क्षेत्र में एक अंडरसीट सुरंग से गुजरेगा। यह 13.2 मीटर व्यास की एक ट्यूब के साथ भारत की पहली अंडरसीट सुरंग और देश का सबसे लंबा रेल परिवहन मार्ग होगा।

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