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Bullet Train: जापानी उपकरण से ट्रेनिंग लेंगे बुलेट ट्रेन के ड्राइवर, शिंदे सरकार ने बढ़ाई प्रोजेक्ट की रफ्तार

Sat, 16 Jul 2022 02:45 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सिमुलेटर लगाने का काम जापान की मित्सुबिशी प्रिसिजन कंपनी लिमिटेड को दिया गया है। इसमें 201.21 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस पैकेज के दायरे में वडोदरा स्थित प्रशिक्षण संस्थान में दो प्रकार के सिमुलेटर लगाए जाएंगे।
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bullet train - फोटो : iStock
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विस्तार
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भारत में बुलेट ट्रेन का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। इस ट्रेन का सफर जितना रोमांचक होने वाला है, उतनी ही रोमांचक इसकी ड्राइविंग भी होने वाली है। हालांकि, बुलेट ट्रेन चलाने वाले ड्राइवरों को खास तरह के प्रशिक्षण से गुजरना होगा। इसके लिए जापान भारत में खास उपकरण लगाने जा रहा है। दरअसल, बुलेट ट्रेन चलाने वाले ड्राइवरों को जापान द्वारा निर्मित अत्याधुनिक सिमुलेटरों से विशेष प्रशिक्षण मिलेगा।

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नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCl) के अधिकारियों ने बताया कि सिमुलेटर पर एकल चालक, एकल कंडक्टर के साथ-साथ चालक, कंडक्टर और अन्य कर्मचारियों का सामूहिक प्रशिक्षण भी आयोजित कराया जा सकेगा। प्रशिक्षण सिमुलेटर ड्राइवरों, कंडक्टरों, प्रशिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को हाई स्पीड ट्रेनों के ड्राइविंग सिद्धांत को समझने में मदद करेंगे। दरअसल, सिमुलेटर एक तरह की डिवाइस है। इसके माध्यम से प्रशिक्षु को आभासी वातावरण दिया जाता है, जिससे वह उन चीजों को महसूस कर सके। सिमुलेटर का ज्यादातर प्रयोग पायलटों व अतंरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग के लिए किया जाता है। 

201.21 करोड़ रुपये की आएगी लागत 
NHSRCl ने वडोदरा में मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए प्रशिक्षण सिमुलेटर के डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति और कमीशनिंग के लिए स्वीकृति पत्र जारी किया है। सिमुलेटर लगाने का काम जापान की मित्सुबिशी प्रिसिजन कंपनी लिमिटेड को दिया गया है। इसमें 201.21 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस पैकेज के दायरे में वडोदरा स्थित प्रशिक्षण संस्थान में दो प्रकार के सिमुलेटर लगाए जाएंगे। चालक दल के प्रशिक्षण के लिए ट्रेन सेट सिमुलेटर और ड्राइवर कंसोल के लिए सिमुलेटर (क्लासरूम टाइप) जिसका उपयोग 10 प्रशिक्षु और एक प्रशिक्षक द्वारा किया जा सकता है।
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शिंदे सरकार आने के बाद बड़ी काम की रफ्तार 
अधिकारियों ने बताया, सरकारी मंजूरी और भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण महाराष्ट्र में अब तक यह योजना अटकी हुई थी। हालांकि, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता संभालने के साथ प्रोजेक्ट ने  गति पकड़ ली है। वर्तमान सरकार द्वारा लगभग सभी लंबित बाधाओं को दूर कर दिया गया है।

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