बुलंदशहर में पुलिस की लापरवाही से मां-बेटी के साथ गैंगरेप की घटना को बदमाश अंजाम दे गए। एक महीने पहले भी इस इलाके में गैंगरेप की घटना हो चुकी है। बुलंदशहर के दोस्तपुर गांव के एक निवासीयों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब यहां बलात्कार की घटना हुई हो। 12 दिन पहले भी कुछ लोगों ने एक महिला को ऑटो में से खींचकर उसके साथ गैंगरेप किया था।
ग्रामीणों के मुताबिक आए दिन इस इलाके में अपराध होता रहता है इसकी वजह यहां स्ट्रीट लाइट और पुलिस की गश्त का न होना है। ठाकुर ने कहा, 'देर शाम स्थानीय लोग भी उस तरफ से नहीं गुजरते।'
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट में गांव के पूर्व प्रधान देवराज ठाकुर ने बताया, 'हमें जैसे ही जानकारी मिली, हम तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे लेकिन तब तक हमलावर भाग चुके थे। महिला बहुत बुरी स्थिति में थी। हमने एक पुलिस के वाहन को रोका जो वहां से गुजर रही थी और उन्हें एक मोबाइल फोन और कुछ कपड़े भी सौंपे जो हमलवार वहां छोड़ गए थे। पुलिस ने फोन लिया और फिर वहां से चली गई। उन्होंने महिला को बाद में थाने बुलाया। हमें नहीं पता फिर उस महिला के साथ क्या हुआ। वह बहुत बुरे हालत में थी और उसे पुलिस की मदद की जरूरत थी।'
'यहां हर महीने बलात्कार होते रहते हैं'
बुलंदशहर गैंगरेप
- फोटो : अमर उजाला
गांव के एक अन्य बुजुर्ग गोविंदपाल सिंह ने कहा, 'यहां हर महीने बलात्कार होते रहते हैं, लेकिन हर किसी के पास इसकी रिपोर्ट कराने की हिम्मत नहीं होती। पुलिस भी मामला दर्ज नहीं करती। यह इलाका अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गया है और वे अक्सर यहां से गुजरने वाले लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। अगर पुलिस ने गश्ती की होती, तो इस अपराध को घटने से रोका जा सकता था।'
वहीं डीआईजी (मेरठ रेंज) लक्ष्मी सिंह ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा, 'यहां अफवाहें बहुत फैलाई जा रही हैं। हम यह स्वीकारतें हैं कि कुछ चूक हुई है जिस वजह से दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है। हम दोषियों को न्याय के कठघरे तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। हम यह कड़ा संदेश भेजना चाहते हैं कि अपराधी हो या लापरवाह पुलिसकर्मी दोनों बख्शे नहीं जाएंगे।'
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस तरह की दो घटनाएं 7 मई और 12 मई को इस इलाके में हो चुकी हैं। हमले में हर बार एक ही तरीका अपनाया जाता है- पहले वे लोग गाड़ी पर पत्थर फेंककर उसे रोकते है। फिर बंदूक का डर दिखाकर लूटपात करते है। पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों में सिर्फ लूटपाट का केस दर्ज कराया गया था। दोनों ही मामलों के अपराधी पकड़े नहीं गए हैं।