राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हो गई है।
लोकसभा एक फरवरी सोमवार को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'राष्ट्रपति राजनीतिक मतभेदों से ऊपर हैं। वह संवैधानिक प्रमुख हैं। उनके संबोधन का सम्मान करना लोकतंत्र का स्वस्थ अभ्यास है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, जिसने इस देश पर 50 साल तक शासन किया, ने इसका बहिष्कार किया। वे किस परंपरा की स्थापना कर रहे हैं?'
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'आज का बजट सत्र राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ, लेकिन यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरे विपक्ष ने इसका बहिष्कार किया। कांग्रेस सांसदों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान संसद में नारेबाजी की, यह बहुत पीड़ादायक है। कांग्रेस नीत संप्रग सरकार में कई 'घोटालों' के बावजूद, भाजपा ने कभी राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार नहीं किया।'
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने का मतलब उनका अपमान करना नहीं है। हम किसानों के साथ खड़े हैं और मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। अभिभाषण के बहिष्कार के पीछे हमारा सबसे बड़ा कारण यही था। जब संसद में धन्यवाद प्रस्ताव और चर्चा होगी तो हम बहस करेंगे।'
आप सांसद संजय सिंह ने कहा, 'कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। हमने राष्ट्रपति के अभिभाषण का विरोध किया और किसानों के समर्थन में नारे लगाए। हमें सेंट्रल हॉल के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए हमने इसके गेट पर नारे लगाए। किसानों को देशद्रोही कहा जा रहा है। इसलिए, हमने संबोधन का बहिष्कार किया।'
राज्यसभा आज दोपहर तीन बजे से शुरू होगी। संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 पेश किया जाएगा।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने आज संसद में राष्ट्रपति रामनांथ कोविंद के अभिभाषण के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर नारेबाजी की और प्लाकार्ड दिखाया।
संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद भवन से रवाना हो गए हैं। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके साथ हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, संसद का यह सत्र बहुत महत्वपूर्ण है। देश कोरोना, भूकंप और बाढ़ से उबरा। भारत जब भी एक हुआ असंभव को संभव किया। चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों न हो, हम न झुकेंगे और न रुकेंगे। देश को खतरनाक आपदा से बाहर निकालकर लाए। कोरोना के इस काल पर सीमा पर तनाव भी बढ़ा।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद भवन पहुंच गए हैं। उन्होंने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करना शुरू कर दिया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संसद भवन पहुंच गए हैं।
वाम दलों के संसद सदस्य (सांसद) संसद में विरोध मार्च निकाल रहे हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति भवन से रवाना हो गए हैं। राष्ट्रपति अपने विशेष अंगरक्षकों के दस्ते के साथ संसद के लिए रवाना हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले, इस दशक का आज ये पहला सत्र प्रारंभ हो रहा है। भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए ये दशक बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रारंभ से ही आजादी के दिवानों ने जो सपने देखे थे, उन सपनों को, उन संकल्पों को तेज गति से सिद्ध करने का ये स्वर्णिम असवर देश के सामने आया है। इस दशक का भरपूर उपयोग हो। पिछले साल वित्त मंत्री ने चार मिनी बजट पेश किए थे। इस बार का बजट सत्र अहम है। सरकार चाहती है कि संसद में चर्चा हो। हम तरह के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं। मैं सभी सांसदों से अपील करता हूं कि संसद की गरिमा को बनाए रखें और अपना सहयोग दें। मुझे आशा है कि ये सत्र बेहतर होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद भवन पहुंच गए हैं।
राष्ट्रपति आज संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद बजट सत्र की शुरुआत हो जाएगी। सत्र का पहला चरण 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें 12 बैठकें होंगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सदन के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 की रिपोर्ट रखेंगी।
केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा सांसद अमित शाह संसद पहुंच गए हैं।
विपक्षी दलों ने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने की घोषणा की है। इसपर केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने कहा, वे लोकतंत्र की गरिमा को धूमिल कर रहे हैं। संसदीय प्रणाली में, राष्ट्रपति की अपनी गरिमा होती है और उनके संबोधन का बहिष्कार करना उनका अपमान है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने आज दोपहर को सदन के फ्लोर लीडर्स (सत्ता और विपक्ष के नेता) की बैठक बुलाई है।
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सत्र का बहिष्कार करने का एलान किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'बीएसपी ने, देश के आंदोलित किसानों के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग नहीं मानने व जनहित आदि के मामलों में भी लगातार काफी ढुलमुल रवैया अपनाने के विरोध में, आज माननीय राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। साथ ही, कृषि कानूनों को वापस लेकर दिल्ली आदि में स्थिति को सामान्य करने का केंद्र से पुनः अनुरोध तथा गणतंत्र दिवस के दिन हुए दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं को बलि का बकरा न बनाएं। इस मामले में यूपी के बीकेयू व अन्य नेताओं की आपत्ति में भी काफी सच्चाई है। सरकार ध्यान दे।'
16 विपक्षी दल करेंगे राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार
सत्र शुरू होने से पहले ही केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जोर आजमाइश की जमीन तैयार हो गई है। कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों ने तीन नए कृषि कानूनों के विरोध और किसान आंदोलन के समर्थन में सत्र के पहले दिन होने वाले राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने की घोषणा की है।