दिल्ली चुनाव के बीच शुरू हो रहे बजट सत्र में जमकर हंगामा होने के आसार हैं। राष्ट्रपति को 'पुअर थिंग' कहने से इसकी शुरुआत हो चुकी है। सत्ता पक्ष ने इसे लेकर बहस शुरू कर दी है और इसे एक आदिवासी महिला का अपमान बताया है। लेकिन सत्ता पक्ष की राह भी आसान नहीं होने वाली है। कुंभ में हुई भगदड़ पर समाजवादी पार्टी ने सरकार को घेरने की चेतावनी दे दी है। केंद्र सरकार इसी सत्र में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को पेश करना चाहती है। मुस्लिम समुदाय की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल इस पर बढ़त हासिल करने का कोई भी अवसर हाथ से नहीं जाने देंगे।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी गिरते रुपये पर बड़ी चिंता व्यक्त किया करते थे, लेकिन अब जबकि रूपया ऐतिहासिक गिरावट तक जा चुका है और इसका देश के व्यापार पर गहरा असर पड़ रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर अपने होंठ सिल लिए हैं। इसके कारण महंगाई लगातार बढ़ रही है और आम आदमी इसमें पिस रहा है। कई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि लोगों की बचत बहुत ज्यादा गिर गई है। लोगों की पूरी कमाई अपना दैनिक-मासिक खर्च चलाने में निकल जा रहा है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई अवसर हाथ से नहीं जाने देगा।
सरकार की चुनौती
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार की सबसे बड़ी चुनौती मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों की जेब में ज्यादा से ज्यादा पैसा डालने की होगी। यदि सरकार इस तरह का कदम उठाती है तो उसके पास लोगों को टैक्स में छूट दायरा बढ़ाने और निवेश पर छूट देने का विकल्प अपनाना पड़ सकता है। लेकिन इसके साथ ही सरकार को आगामी बड़ी परियोजनाओं के लिए धन जुटाने की भी चुनौती होगी। ऐसे में सरकार के सामने मध्यम मार्ग अपनाने का रास्ता खुला हो सकता है जिसके जरिए वह थोड़ा-थोड़ा दोनों लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करे।
डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि सरकार को जीएसटी के माध्यम से रिकॉर्ड कर संग्रह हो रहा है, लेकिन इसी के साथ यह भी सही है कि सभी वर्गों के लिए वस्तुओं की कीमतों में उछाल आया है जिससे एफएमसीजी की वस्तुओं की खपत में भी कमी आई है। इसकी कमी से पूरी अर्थव्यवस्था में ठहराव का खतरा पैदा हो सकता है। एफएमसीजी उत्पादों को बनाने वाली छोटी-छोटी कंपनियों-फैक्ट्रियों में उत्पादन लागत कम करने का प्रयास करना होगा। सरकार को मध्य-निम्न आय वर्ग के हाथों में ज्यादा पैसा छोड़ने की रणनीति अपनानी होगी जिससे वह इन वस्तुओं की खरीद कर अर्थव्यवस्था को गति दे सके।
दिल्ली को लेकर घेर सकती है आम आदमी पार्टी
चुनाव के कारण इस बार बजट में दिल्ली को लेकर कोई बजटीय प्रावधान नहीं दिखाई देंगे। अरविंद केजरीवाल जिस तरह की राजनीति करते हैं, वे इसे लेकर भी कोई बयानबाजी करें और इसे मुद्दा बनाने की कोशिश करें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। केजरीवाल पहले ही आयकर की सीमा बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी इसे लेकर भी हंगामा खड़ा कर सकती है।
संजय सिंह जिस तरह से मुद्दे उठाने के लिए जाने जाते हैं, वे संसद सत्र के दौरान भी आम आदमी पार्टी नेताओं पर हो रही कार्रवाई का मामला सदन में उठा सकते हैं। वे संसद सत्र का उपयोग आम आदमी पार्टी के मुद्दे उठाने के लिए सदन के अंदर और संसद परिसर का उपयोग कर सकते हैं। आम आदमी पार्टी नेता भगवंत सिंह मान के दिल्ली स्थित ठिकाने पर चुनाव आयोग की कार्रवाई पर भी हंगामा खड़ा कर सकते हैं।
हालांकि, आम आदमी पार्टी को इसी बीच अमृतसर में बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के साथ हुई छेड़छाड़ और पंजाब की कानून व्यवस्था पर हंगामे का सामना करना पड़ सकता है। पंजाब में एक देश विरोधी संगठन की गतिविधियों पर भी आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश हो सकती है।