प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 79 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। अब तक प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 2.95 करोड़ पात्र लोगों में से 2.94 करोड़ के घरों को स्वीकृति मिली। इसमें से 2.79 करोड़ घरों को तेजी से बनाने का काम किया जा रहा है। इसमें 2.13 करोड़ घर पूरे हो गए हैं। ग्रामीण आवास योजना में 3 करोड़ घर बनाए जाने थे।
- मनरेगा बजट में लगातार तीसरी बार कटौती की गई है। इस वर्ष 60 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 34 फीसदी कम है।
- सतत लघु सिंचाई योजना के तहत 53 हजार करोड़ की मंजूरी दी गई है। इसे पेयजल और पानी के भंडारण में भी खर्च िकया जाएगा।
पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालन के लिए 6,000 करोड़
पीएम मत्स्य संपदा योजना में मछुआरों की आय बढ़ाने के साथ मछली पकड़ने के लिए आधुनिक तकनीकों और इन्हें बाजार में उचित कीमत दिलाने के लिए प्लेटफार्म दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 6 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा किसानों को खेती के अलावा वैकल्पिक आय के साधन मुहैया कराने के लिए, मछुआरों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने आकर्षक योजना का आगाज किया है।
- इस मद से मछुआरों, मछली विक्रेताओं और सूक्ष्म व लघु उद्यमों की गतिविधियों को साकार करने के लिए, कीमतों में सुधार और उचित कीमत दिलाने के लिए बाजार के साथ अत्याधुनिक तकनीक आधारित मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा।
- इसके साथ ही पीएम मत्स्य संपदा योजना के नाम से एक नई उप योजना शुरू की जाएगी।
बागवानी के लिए 2,200 करोड़ रुपये
सरकार ने इस बार बागवानी को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। इसके तहत बागवानी की उपज के लिए 2,200 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। इससे किसानों को बागवानी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पौध सामग्री की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी ताकि किसान पारंपरिक फसलों के अलावा बागवानी के जरिये अपनी आय में इजाफा कर सके। इसी के तहत आत्मनिर्भर स्वच्छ पौध कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।
मीठी क्रांति (मधुमक्खी पालन) के माध्यम से कृषि क्षेत्र में 4.60 लाख रोजगार सृजित होंगे। बजट में इसका प्रावधान किया गया है। वैसे कृषि मंत्रालय की यह योजना 2022-21 से शुरू हुई थी। इसका मकसद किसानों को आय के वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध कराना था। इसके लिए केंद्र सरकार उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और विपणन तक के लिए उत्पादकों को मंच उपलब्ध कराती है। इसके तहत 2023 तक शहद के उत्पादन को 16 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 42 लाख मीट्रिक टन करना है।
- कृषि कल्याण मंत्रालय ने किसानों की आय दोगुना करने के लिए इस योजना को शुरू किया था।
- इसका मकसद किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध होने में मदद करना था। भारत का दुनिया के शहद उत्पादकों में पांचवां स्थान है।
पीपीपी मॉडल से कपास को संजीवनी
कपास की उत्पादकता को और बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल के जरिये क्लस्टर बेस्ड और वैल्यू चेन अप्रोच को अपनाया जाएगा। इसमें किसानों, राज्यों और उद्योगों में आपसी सहयोग स्थापित किया जाएगा। इससे इनपुट सप्लाई, एक्सटेंशन सर्विस और मार्केट लिंकेज में भी मदद मिलेगी। साथ ही कृषि में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी।
तीन साल में एक करोड़ किसान प्राकृतिक खेती से जोड़े जाएंगे
- अगले 3 वर्षों में सरकार 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सहायता देगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर वितरित सूक्ष्म-उर्वरक और कीटनाशक विनिर्माण नेटवर्क बनाते हुए 10,000 बायो इनपुट रिसोर्स केन्द्र स्थापित किए जाएंगे।
- सहकार से समृद्धि कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके जरिये 63,000 एग्री सोसाइटी का कंप्यूटरीकरण होगा।