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Budget 2023: जय किसान... जैविक खेती व कृषि स्टार्टअप की सौगात, 20 लाख करोड़ ऋण बांटने का लक्ष्य

Thu, 02 Feb 2023 06:07 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

सरकार का जोर अन्नदाता की आय बढ़ाने के साथ देश के पर्यावरण से लेकर पोषण पर भी है। इसलिए हरित खेती, मोटा अनाज को मिला ‘श्रीअन्न’ नाम और कृषि ऋण को 11 प्रतिशत बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : PTI
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विस्तार
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सरकार ने परंपरागत खेती को पुनर्जीवित करने, कृषि स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कृषि त्वरक कोष की स्थापना, जैविक खाद के लिए पीएम प्रणाम योजना और डिजिटल आधुनिक खेती को चमकाने के लिए कई सौगात दी है।

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सरकार का जोर अन्नदाता की आय बढ़ाने के साथ देश के पर्यावरण से लेकर पोषण पर भी है। इसलिए हरित खेती, मोटा अनाज को मिला ‘श्रीअन्न’ नाम और कृषि ऋण को 11 प्रतिशत बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इसके अलावा खेती में डिजिटल तकनीक, मछली और पशुपालन के साथ सरकार सहकार से समृद्धि के लक्ष्य को हासिल करेगी। किसानों के सर्वांगीण विकास के लिए इस बजट में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-एनएफएसएम की योजना लागू कर रही है। इसे केंद्र सरकार प्रायोजित करेगी।

इस बार बजट में किसानों की आय को दोगुना बढ़ाने के लिए सरकार ने कई नई योजनाओं का प्रावधान किया है। इस बजट में कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए वर्ष 2023-24 के लिए 9,504 करोड़ दिए गए हैं। इससे उच्च गुणवत्ता उपज, जैविक खेती के साथ बीज गुणवत्ता और फसलों में लगने वाले रोगों को कमतर करने, नए बीजों की उन्नत किस्मों पर शोध और प्रसंस्करण पर काम किया जाएगा। इसके अलावा बजट में केंद्र सरकार ने किसानों के लिए और भी कई लाभकारी योजनाओं की घोषणा की है।
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63000 कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण  
63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। इनके लिए राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके साथ बड़े पैमाने पर विकेंद्रीकृत भंडारण क्षमता स्थापित
की जाएगी।

मोटा अनाज अब ‘श्रीअन्न’
मोटे अनाज को अब दुनिया में मान्यता दिलाने के लिए भारत और तत्परता से काम करेगा। इसके लिए अब मोटे अनाज को श्रीअन्न नाम दिया गया है। इसके तहत हैदराबाद में सेंटर फॉर एक्सीलेंस बनाया जाएगा। इसके माध्यम से पोषण, किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

कृषि त्वरक कोष की स्थापना
ग्रामीण भारत में युवाओं को कृषि के माध्यम से आजीविका के साथ कृषि आधारित नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए कृषि त्वरक कोष स्थापित किया जाएगा। इसका लक्ष्य किसानों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का रचनात्मक, नवीन, किफायती समाधान देना है। इसकी मदद से कृषि को लेकर किसानों की सोच को बदलने के साथ उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक से भी किसानों को परिचित कराया जाएगा।

एक प्लेटफॉर्म पर खेती किसानी की पूरी जानकारी
कृषि के लिए डिजिटल अवसंरचना के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का प्रावधान किया गया है। इसके तहत किसानों को खेती किसानी के लिए समस्त जानकारी सूचनाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इसमें फसल योजना, फसल के स्वास्थ्य और मौसम के हाल के साथ फसल विविधीकरण से संबंधित प्रासंगिक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

  • इससे किसानों के लिए समावेशी कृषि की राह आसान होगी। उन्हें समय से घर बैठे किसान केंद्रित समाधान, जिनमें कृषि ऋण, तकनीक, उत्पादन के लिए उचित प्लेटफॉर्म और समर्थन के साथ स्टार्टअप की मदद मिल सकेगी।


1.6 लाख रुपये हुई कृषि ऋण सीमा
वित्त मंत्री ने औपचारिक ऋण प्रणाली में छोटे और सीमांत किसानों के दायरे को बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक की गारंटी-मुक्त कृषि ऋण की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.6 लाख रुपये करने की घोषणा की है।

पीएम आवास के लिए 79 हजार करोड़ मिले

पीएम आवास योजना। - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 79 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। अब तक प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 2.95 करोड़ पात्र लोगों में से 2.94 करोड़ के घरों को स्वीकृति मिली। इसमें से 2.79 करोड़ घरों को तेजी से बनाने का काम किया जा रहा है। इसमें 2.13 करोड़ घर पूरे हो गए हैं। ग्रामीण आवास योजना में 3 करोड़ घर बनाए जाने थे।
  • मनरेगा बजट में लगातार तीसरी बार कटौती की गई है। इस वर्ष 60 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 34 फीसदी कम है। 
  • सतत लघु सिंचाई योजना के तहत 53 हजार करोड़ की मंजूरी दी गई है। इसे पेयजल और पानी के भंडारण में भी खर्च िकया जाएगा। 

पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालन के लिए 6,000 करोड़
पीएम मत्स्य संपदा योजना में मछुआरों की आय बढ़ाने के साथ मछली पकड़ने के लिए आधुनिक तकनीकों और इन्हें बाजार में उचित कीमत दिलाने के लिए प्लेटफार्म दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 6 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा किसानों को खेती के अलावा वैकल्पिक आय के साधन मुहैया कराने के लिए, मछुआरों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने आकर्षक योजना का आगाज किया है।
  • इस मद से मछुआरों, मछली विक्रेताओं और सूक्ष्म व लघु उद्यमों की गतिविधियों को साकार करने के लिए, कीमतों में सुधार और उचित कीमत दिलाने के लिए बाजार के साथ अत्याधुनिक तकनीक आधारित मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। 
  • इसके साथ ही पीएम मत्स्य संपदा योजना के नाम से एक नई उप योजना शुरू की जाएगी।

बागवानी के लिए 2,200 करोड़ रुपये
सरकार ने इस बार बागवानी को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। इसके तहत  बागवानी की उपज के लिए 2,200 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। इससे किसानों को बागवानी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पौध सामग्री की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी ताकि किसान पारंपरिक फसलों के अलावा बागवानी के जरिये अपनी आय में इजाफा कर सके। इसी के तहत आत्मनिर्भर स्वच्छ पौध कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। 
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मीठी क्रांति से ग्रामीण भारत में सृजित होंगे 4.60 लाख रोजगार

मधुमक्खी पालन। - फोटो : अमर उजाला
मीठी क्रांति (मधुमक्खी पालन) के माध्यम से कृषि क्षेत्र में 4.60 लाख रोजगार सृजित होंगे। बजट में इसका प्रावधान किया गया है। वैसे कृषि मंत्रालय की यह योजना 2022-21 से शुरू हुई थी। इसका मकसद किसानों को आय के वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध कराना था। इसके लिए केंद्र सरकार उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और विपणन तक के लिए उत्पादकों को मंच उपलब्ध कराती है। इसके तहत 2023 तक शहद के उत्पादन को 16 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 42 लाख मीट्रिक टन करना है।
  • कृषि कल्याण मंत्रालय ने किसानों की आय दोगुना करने के लिए इस योजना को शुरू किया था।
  • इसका मकसद किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध होने में मदद करना था। भारत का दुनिया के शहद उत्पादकों में पांचवां स्थान है।

पीपीपी मॉडल से कपास को संजीवनी
कपास की उत्पादकता को और बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल के जरिये क्लस्टर बेस्ड और वैल्यू चेन अप्रोच को अपनाया जाएगा। इसमें किसानों, राज्यों और उद्योगों में आपसी सहयोग स्थापित किया जाएगा। इससे इनपुट सप्लाई, एक्सटेंशन सर्विस और मार्केट लिंकेज में भी मदद मिलेगी। साथ ही कृषि में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक  को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी।

तीन साल में एक करोड़ किसान प्राकृतिक खेती से जोड़े जाएंगे
  • अगले 3 वर्षों में सरकार 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सहायता देगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर वितरित सूक्ष्म-उर्वरक और कीटनाशक विनिर्माण नेटवर्क बनाते हुए 10,000 बायो इनपुट रिसोर्स केन्द्र स्थापित किए जाएंगे।
  • सहकार से समृद्धि कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके जरिये 63,000 एग्री सोसाइटी का कंप्यूटरीकरण होगा।
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