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Budget 2020 : वित्त मंत्री सीतारमण का दूसरा बजट आज, घाटे की चिंता छोड़ बढ़ाना होगा खर्च

Sat, 01 Feb 2020 07:50 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 2025 तक इन्फ्रा क्षेत्र पर 100 लाख करोड़ निवेश की जरूरत
  • सर्वेक्षण में कहा गया- राजकोषीय दबाव को तैयार रहे सरकार
  • साल 2025 तक इन्फ्रा क्षेत्र को 100 लाख करोड़ रुपये चाहिए
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आम बजट एक फरवरी 2020 को पेश करेंगी। इससे पहले शुक्रवार 31 जनवरी को केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के जरिये ‘अच्छे दिन’ का भरोसा दिलाया और सुनहरे भविष्य की उम्मीद जताई। इस सर्वे में पांच साल में चार करोड़ नौकरियां देने का चीन का फॉर्मूला सुझाया गया है। आम बजट में वित्त मंत्री से उम्मीदें होंगी और उनके सामने सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की बड़ी चुनौती होगी।

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आर्थिक विकास को गति देने और अर्थव्यवस्था को 50 खरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए सरकार को राजकोषीय घाटे की परवाह किए बिना खर्च को बढ़ाना होगा। आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 में कहा गया है कि इन्फ्रा की मजबूती से ही विकास दर बढ़ेगी। इसके लिए 2025 तक इस क्षेत्र को 100 लाख करोड़ चाहिए, ताकि ऊर्जा, परिवहन और संपर्क साधनों की पर्याप्त पहुंच को सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार का मानना है कि बिना आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाए अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों को पाना मुश्किल होगा। इसके लिए बनाए जा रहे नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) के जरिये रोजगार सृजन, जीवन सुगमता और सभी नागरिकों तक इसकी सुविधाओं को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें केंद्र और राज्यों की 39-39 फीसदी की भागीदारी होगी, जबकि 22 फीसदी भूमिका निजी क्षेत्र निभाएगा। साथ ही राजकोषीय दबाव सहने को तैयार रहना होगा।
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इस्पात खपत बढ़ाने पर जोर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सर्वेक्षण में इस्पात उत्पादन और खपत बढ़ाने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में आ रही गिरावट का जिक्र होना इस्पात के साथ ही तेल-गैस क्षेत्र के लिए अच्छा संकेत है। इसके ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा।

कारोबार : बेहतर करनी होगी माल ढुलाई

nirmala sitharaman - फोटो : PTI
देश के कारोबार को बढ़ाने के लिए निर्यात और माल ढुलाई की सुविधाएं बेहतर बनानी होंगी। देश के कुल व्यापार में 95 फीसदी हिस्सेदारी समुद्री मार्ग की है। 30 सितंबर, 2019 तक भारत के पास कुल 1,419 जहाजों का बेड़ा था। बंदरगाहों की कुल सालाना क्षमता 151.40 करोड़ टन रही थी। 

सरकार की मंशा इसके ढांचे को और मजबूत बनाने के साथ कारोबार को गति देने की है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि 2018-19 के दौरान देश में कुल रेल यात्रियों की संख्या में 1.85 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, तो रेलमार्ग से माल ढुलाई में भी 5.34 फीसदी का इजाफा हुआ है।  

2022 तक सबको चिकित्सा-आवास  

सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण व शहरी आवास योजना के बूते वर्ष 2022 तक सभी को आवास मुहैया कराने के लक्ष्य को पूरा करने का दावा किया है। सर्वेक्षण में कहा गया कि 2014-15 में ग्रामीण क्षेत्र में 11.95 लाख मकान बने थे, जो 2018-19 में 47.33 लाख हो गए। इसी तरह, सरकार ने कहा है कि आयुष्मान भारत योजना में 2022 तक डेढ़ लाख स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र खोले जाएंगे और हर नागरिक तक चिकित्सा सुविधा की पहुंच होगी।

परिवहन : आकाश से जल-जमीन तक व्यापक सुधार की जरूरत

बजट 2019, निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाने वाले परिवहन क्षेत्र को व्यापक सुधार की जरूरत है। इसके लिए सड़क, हाइवे, रेलमार्ग, हवाई यातायात और जलमार्गों का समुचित रूप से विकास करना होगा। आर्थिक सर्वेक्षण में पेश की गई मौजूदा तस्वीर के अनुसार, सड़क क्षेत्र के विकास के लिए अकेले हाईवे प्रोजेक्ट को ही अगले पांच वर्षों में 19.63 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी।

कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 4.77 फीसदी

2017-18 के आंकड़ों के अनुसार, देश में स्थित कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी 4.77 फीसदी है, जिसमें सबसे ज्यादा 3.06 फीसदी की भागीदारी अकेले सड़क परिवहन की होती है। इसके अलावा रेलवे का हिस्सा 0.75 फीसदी, हवाई क्षेत्र 0.15 फीसदी और जलमार्ग का 0.06 फीसदी ही है।

रोजाना बन रही 29.7 किमी लंबी सड़क, विकसित होंगे 100 नए एयरपोर्ट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई
देश में मौजूद कुल 59.64 लाख किलोमीटर की सड़कों के जाल में राष्ट्रीय राजमार्ग की भागीदारी 1.32 लाख किलोमीटर की है। इसकी लंबाई और बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिदिन औसतन 29.7 किलोमीटर की सड़क बना रही है।

वहीं, हवाई क्षेत्र में सुधार के लिए 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने के साथ 2024 तक विमानों की संख्या 1,200 करने की तैयारी है, जो अभी 680 के करीब है।

जीडीपी की पांच फीसदी विकास दर अच्छी

हम जिन शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे लगता है कि हम मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। इसलिए हमें सतर्क रहना है कि हम क्या बोल रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब है, इसके बावजूद हम पांच फीसदी की विकास दर से आगे बढ़ रहे हैं, जो अच्छा है।
- कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन, मुख्य आर्थिक सलाहकार
 

महंगाई : उत्पादन बढ़ाने से घटेंगे अनाज के दाम

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
उपभोक्ता आधारित खुदरा महंगाई की दर 2014 के बाद से औसत ही रही, लेकिन दाल और सब्जियों की ऊंची कीमतों के चलते 2019 में पहली बार इसमें इजाफा हुआ। आर्थिक सर्वेक्षण में पेश की गई महंगाई की तस्वीरों से साफ है कि पिछले साल खाद्य कीमतों में उछाल दिखा, लेकिन किसानों तक उचित लाभ नहीं पहुंचा। 

सर्वेक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि किसानों को फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद के जरिये मदद की जाए, ताकि खाद्य पदार्थों की कीमतों को स्थिर रखा जा सके। 2019 में असमान बारिश की वजह से फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ, जिसका असर भी महंगाई पर पड़ा है। अप्रैल-दिसंबर (2019-20) के दौरान खुदरा महंगाई की दर 4.1 फीसदी रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 3.7 फीसदी थी। दूसरी ओर, थोक महंगाई पिछले साल के 4.7 फीसदी गिरकर 1.5 फीसदी पर आ गई।

किसान : सिंचाई और कर्ज से दोगुनी होगी आय

निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य पाने के लिए सरकार को तत्काल प्रभाव कृषि क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों से पार पाना होगा। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कर्ज, बीमा और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से ही क्षेत्र को पर्याप्त गति दी जा सकती है। 

इसके अलावा किसानों की प्रत्यक्ष आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों की राह खोलने से भी दोगुनी आय के लक्ष्य तक पहुंचा जा सकेगा। सर्वे के अनुसार, कृषि क्षेत्र में निवेश, जल संरक्षण, खेती की नई तकनीक से पैदावार बढ़ाने और गैर कृषि क्षेत्रों के साथ इसके बेहतर तालमेल जैसी समस्याओं का भी जल्द समाधान निकालना बेहद जरूरी है।
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रियल एस्टेट : मकानों की कीमत घटे तो बढ़ेगी मांग

निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
बिल्डरों द्वारा देरी से मकान देने और परियोजनाएं फंसने से आवासीय संपत्ति के बाजार में बिना बिके फ्लैटों का अंबार लग गया है। लेकिन, यदि बिल्डर मकानों की कीमतों में कमी करे तो न सिर्फ उनके फ्लैट बिक जाएंगे, बल्कि बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की बैलेंसशीट भी सुधर जाएगी। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, इस समय मकानों की कीमत उच्च स्तर पर है। 

ऐसी हालत तब है, जब वर्ष 2015-16 से ही कीमतों में वृद्धि में ठहराव सा आ गया है। सरकार सबको आवास उपलब्ध कराना चाहती है, उसलिए उसका जोर किफायती आवासों पर है। सरकार रियल एस्टेट क्षेत्र में बढ़ोतरी और भवन निर्माण गतिविधियों में तेजी चाहती है। लोग आवासीय क्षेत्र में निवेश बढ़ाएंगे तो अर्थव्यवस्था में भी निवेश में बढ़ोतरी होगी, जिसका मतलब है कि इसका असर दूसरे क्षेत्र पर भी पड़ेगा। 

समीक्षा के मुताबिक, बिल्डरों के बिना बिके मकानों की संख्या में कमी आ सकती है और बैंकों व एनबीएफसी का एनपीए भी घट सकता है, बशर्ते बिल्डर मकानों की कीमतों में कमी करें।
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