देश में पहली बार एतिहासिक बजट हुआ है। सरकार ने आयकर के स्लैब में बदलाव किया और करदाताओं को पुरानी व्यवस्था से टैक्स देने की छूट दे दी है। 70 डिडक्शन वापस ले लिया है। अभी तक किसी बजट में इस तरह के भ्रम में आयकरदाता को नहीं रखा गया था। बजट में सरकार ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा दिया है।
लेकिन पूरे बजट में निवेशक, उपभोक्ता के बीच में विश्वास बढ़ाने की कोई पहल नहीं हो पाई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलआईसी में हिस्सेदारी बेचने, 150 निजी ट्रेन चलाने, एयर इंडिया को बेचने जैसी घोषणाओं के साथ देश की अर्थव्यवस्था में चल रही मंदी का संकेत दे दिया, लेकिन इसे पटरी पर लाने के कोई उपाय नहीं सुझाए हैं।
चुनौतियां
- देश में बेरोजगारी का स्तर 45 साल का रिकार्ड तोड़ रहा है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने कोई रोडमैप नहीं दिखाया है। बजट में छोटे स्तर के रोजगार का रास्ता दिखाया है, लेकिन स्किल्ड क्लास के लिए कोई रोशनी नहीं दिखाई दे रही है।
- वित्त मंत्री ने शिक्षा के बजट में पिछले बजट से केवल पांच हजार करोड़ रुपये बढ़ाए हैं। अब शिक्षा के मद में 99300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। मंहगाई दर जोड़ ली जाए तो यह बजट वृद्धि न के बराबर है। मौजूदा समय में मुंबई आईआईटी जैसे संस्थान, हॉस्टल समेत अन्य कमियों से जूझ रहे हैं। केन्द्रीय विद्यालय संगठन से लेकर अन्य केन्द्रीय संस्थानों को वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। इसके सामानांतर 150 उच्च शिक्षण संस्थान, एक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय खोलने की योजना है।
- बजट 2020-21 के अनुसार बैंक के डूबने पर उपभोक्ताओं के पांच लाख रुपये तक की राशि सुरक्षित रहेगी। केन्द्र सरकार ने यह कदम महाराष्ट्र में बैंक के दिवालिया होने के बाद यह प्रावधान किया है। देश में यह वातावरण भी पहली बार बन रहा है, जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के डूबने की स्थिति बन रही है। माना जा रहा है कि इसके कारण देश में आर्थिक निवेश का वातावरण नहीं बन पा रहा है।
- पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि बजट में केन्द्रीय वित्त मंत्रियों ने माइक्रो इकोनामिक चुनौतियों से पूरी तरह से मुंह मोड़ लिया है।
- छह तिमाही से अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त चल रही है। केन्द्र सरकार ने इसे बूस्ट करने के कोई उपाय नहीं किए हैं।
- बजट में बाजार में मांग बढ़ने के उपाय को लेकर कोई सुधारात्मक कदम स्पष्ट नहीं है।
- बजट 2020-21 में खाद्य सब्सिडी में पिछले बजट से 68650 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। इसी तरह से किसानों को दी जाने वाली खाद सब्सिडी में भी पिछले साल के बजट से 8 हजार करोड़ रुपये की कटौती हुई है। 75 प्रतिशत किसानों को प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना का लाभ नहीं मिला है। इससे किसानों की आय दोगुनी करने, खर्च आधा घटाने का रोडमैप नजर नहीं आ रहा है।
शेयर बजार में कोहराम
पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय में ऐसा पहली बार हुआ है कि केन्द्रीय वित्तमंत्री बजट पेश कर रही थीं और शेयर बाजार में सेंसेक्स तेजी से गिर रहा था। 987 अंक तक नीचे आया। निफ्टी में 300 अंको की गिरावट दर्ज की गई। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी कंपनियों के कैपेक्स में बजट को लेकर निराशा देखी गई