किसान नेता का कहना है, जो भी सरकार सत्ता में आती है, वह किसानों को लोन देने की सीमा बढ़ाकर वाहवाही लूटनी शुरू कर देती है। ये तरीका हमें समझ नहीं आता। कोई हमें बता दे कि सरकार अन्नदाता को कर्जमुक्त करने की बजाए उसे कर्जदार ही क्यों बनाना चाह रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहती हैं कि हमने 2020-21 के लिए किसानों को 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि लोन देने का लक्ष्य तय किया है। वे किसानों को कर्जदार बनाए रखना चाहती हैं। ये सामान्य सी बात है कि जो लोन लेगा, तो उसे चुकाना भी होगा। यहां बात किसान की हो रही है, जहां फसल की बुआई से लेकर उसके कटने और मंडी में पहुंचने तक जोखिम ही जोखिम होता है।
बजट में कहा गया है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रूट पर किसानों के लिए कृषि उड़ान सेवा शुरू होगी। किसान नेता ने कहा, कोई बताएगा कि इससे किसान को क्या फायदा होगा। ये सब तो व्यापारियों के लिए है। किसान के खेत से एक बार फसल बाहर आ जाती है, तो वह व्यापारी का माल बन जाती है। वह अपनी सुविधा और लाभ के अनुसार उसे रखेगा या बेचेगा।आ ज भी देश और विदेश से रोजाना कृषि उत्पादों का आना-जाना होता है। यह कौन सी नई बात है। इसमें किसानों का क्या रोल है।
इसी तरह किसान रेल की बात है। रेलवे के पास रेफ्रिजरेटेड डिब्बे तो पहले से हैं। कोल्ड स्टोरेज भी हैं। बजट में किसानों को छला गया है। सरकार को ग्रामीण सेक्टर पर फोकस करना चाहिए था। अगर किसान की आय बढ़ती है, तो उसकी खरीदारी क्षमता भी बढ़ जाएगी। इससे सरकार की हिचकोले खाती अर्थव्यवस्था भी पटरी पर लौट आएगी।