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Budget 2020: अन्नदाता को कर्जदार बनाए रखना चाहती है सरकार- सरदार वीएम सिंह

Sat, 01 Feb 2020 03:59 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Nirmala Sitharaman - फोटो : PTI
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केंद्र सरकार ने अपने बजट में 2020-21 के लिए किसानों को 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि लोन देने का लक्ष्य रखा है। किसान नेता सरदार वीएम सिंह ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाया है। वे कहते हैं, सरकार अन्नदाता को कर्जदार ही बनाए रखना चाहती है। पहले किसान को लोन दो और फिर जब वह लोन समय पर चुकता नहीं होगा तो किसान आत्महत्या करेगा। बजट में ऐसा कोई प्रावधान क्यों नहीं लाया गया है जिससे किसानों को लोन देने की जरूरत ही न पड़े।

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वह कहते हैं, अच्छा होता कि किसान को उसकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अच्छा मिल जाता। दूसरा, बजट में कहा गया है कि अब 'कृषि उड़ान' सेवा और किसान रेल शुरू करेंगे। बतौर वीएम सिंह, इसमें किसान को क्या फायदा हुआ। ये उन लोगों के लिए सुविधा है जो कृषि उत्पादों का कारोबार करते हैं। देश में आज भी हवाईजहाज और रेल से कृषि उत्पाद आते-जाते हैं। सरकार ने अपने बजट में किसानों को केवल गुमराह करने का काम किया है। अच्छा होता कि मनेरगा जैसी स्कीम को कृषि क्षेत्र के साथ ही लिंक कर देते, क्योंकि कृषि क्षेत्र में अब कामगारों की समस्या आ रही है।
 

किसान नेता का कहना है, जो भी सरकार सत्ता में आती है, वह किसानों को लोन देने की सीमा बढ़ाकर वाहवाही लूटनी शुरू कर देती है। ये तरीका हमें समझ नहीं आता। कोई हमें बता दे कि सरकार अन्नदाता को कर्जमुक्त करने की बजाए उसे कर्जदार ही क्यों बनाना चाह रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहती हैं कि हमने 2020-21 के लिए किसानों को 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि लोन देने का लक्ष्य तय किया है। वे किसानों को कर्जदार बनाए रखना चाहती हैं। ये सामान्य सी बात है कि जो लोन लेगा, तो उसे चुकाना भी होगा। यहां बात किसान की हो रही है, जहां फसल की बुआई से लेकर उसके कटने और मंडी में पहुंचने तक जोखिम ही जोखिम होता है।

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वह कहते हैं कि इनमें से ज्यादातर जोखिम प्राकृतिक हैं तो कुछ मानवजनित भी हैं। ऐसे में किसान पर कर्ज का बोझ बढ़ता जाएगा। अंत में उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचेगा। वीएम सिंह के अनुसार, सरकार कुछ ऐसा करे कि जिससे किसान को कर्ज लेना ही न पड़े। अगर किसान को उसकी फसल का उचित एमएसपी मिल जाए तो उसे कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। दूसरा, कृषि क्षेत्र में जोखिम को लेकर सरकार किसान को गारंटी दे कि ऐसा कुछ होता है तो उसकी भरपाई हो जाएगी।

कृषि उड़ान योजना और किसान रेल सेवा से क्या फायदा होगा

बजट में कहा गया है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रूट पर किसानों के लिए कृषि उड़ान सेवा शुरू होगी। किसान नेता ने कहा, कोई बताएगा कि इससे किसान को क्या फायदा होगा। ये सब तो व्यापारियों के लिए है। किसान के खेत से एक बार फसल बाहर आ जाती है, तो वह व्यापारी का माल बन जाती है। वह अपनी सुविधा और लाभ के अनुसार उसे रखेगा या बेचेगा।आ ज भी देश और विदेश से रोजाना कृषि उत्पादों का आना-जाना होता है। यह कौन सी नई बात है। इसमें किसानों का क्या रोल है।
 

इसी तरह किसान रेल की बात है। रेलवे के पास रेफ्रिजरेटेड डिब्बे तो पहले से हैं। कोल्ड स्टोरेज भी हैं। बजट में किसानों को छला गया है। सरकार को ग्रामीण सेक्टर पर फोकस करना चाहिए था। अगर किसान की आय बढ़ती है, तो उसकी खरीदारी क्षमता भी बढ़ जाएगी। इससे सरकार की हिचकोले खाती अर्थव्यवस्था भी पटरी पर लौट आएगी।

 

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