इस बजट में प्रत्यक्ष कर मोर्चे पर आम जनता को कर की दरों में भले ही कोई राहत नहीं मिली हो, लेकिन सहूलियत काफी बढ़ गई है। इस बजट से आम जनता को काफी आस थी, कि पांच लाख रुपये से दस लाख रुपये की आमदनी पर जो 20 फीसदी का आयकर लिया जा रहा है, उसे 10 फीसदी कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे साल में छह-सात लाख रुपये कमाने वालों को भी बहुत ज्यादा आय कर देना होगा।
उदाहरण के लिए मान लिया जाए कि किसी की आमदनी छह लाख रुपये है तो उसे पांच लाख रुपये तक की आमदनी पर तो 12500 रुपये का कर चुकाना होगा और इससे ऊपर की एक लाख रुपये की आय पर 20 हजार का कर। कुल मिला कर उसे 32500 रुपये का कर चुकाना होगा जो कि इतने कम आमदनी वालों के लिए बोझ है और वह इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
बजट के जरिये पैन के बदले आधार संख्या को मान्य करना सहूलियत भरा कदम है। अभी जो लोग आय कर देते हैं, उनके पास तो आयकर विभाग का स्थायी खाता संख्या -पैन- है ही लेकिन आने वाले समय में जो आय कर चुकाना शुरू करेंगे, उनके लिए सिर्फ आधार संख्या से ही रिटर्न फाइल करना संभव हो जाएगा। इससे उनके लिये पैन लेने की अनिवार्यता भी नहीं रहेगी।
प्री फिल्ड रिटर्न फार्म की शुरूआत भी सहूलियत की दिशा में उठा मजबूत कदम है। कोई आम कर दाता बैंक में पैसे रखता है, शेयर बाजार में निवेश करता है या म्यूचुअल फंड खरीदता है, सब जगत पैन नंबर या आधार नंबर तो देता ही है। आयकर विभाग उन सभी जगहों से ही सूचना लेकर रिटर्न फार्म भर कर आयकर दाता को देगा। आयकर दाता के पास भरा हुआ फार्म आएगा तो उनका समय बचेगा।
इस कदम का सबसे ज्यादा फायदा निश्चित आमदनी वालों को होगा और वह अपने आप आयकर रिटर्न फार्म भर पाएंगे। इसमें स्टार्टअप के लिए बेहतर कदम उठाया गया है। उसकी प्रक्रिया आसान कर दी गई है। आयकर रिटर्न की स्क्रूटिनी के लिए एक केंन्द्रीय कार्यालय का प्रावधान है मतलब इससे मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो जाएगा। अधिकतर काम कंप्यूटर करेगा इसलिए भेदभाव का आरोप भी नहीं लगेगा।
(सुधीर चंद्रा, पूर्व चेयरमैन सीबीडीटी)