बजट में केवल एक चीज अच्छी है। महिलाओं को पहली बार आर्थिक विकास की धुरी माना गया। ग्रामीण महिलाओं की उपयोगिता को पहचाना गया है, लेकिन छूट क्या है। सिंगल मदर बढ़ रही हैं। उनके लिए क्या योजना है। महिला सुरक्षा के हालात खराब हैं, इसके लिए किसी योजना का प्रावधान नहीं है। सोना आयात करने पर ढाई फीसदी आयात शुल्क बढ़ाने का असर स्त्री धन पर पड़ेगा। मध्यम वर्ग की कामकाजी महिलाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं है। जबकि देश की 50 फीसदी से ज्यादा महिलाएं कामकाजी हैं।
केवल व्यापार को छूट देकर आप क्या साबित करना चाहते हैं। मोदी सरकार केवल कुछ घरानों के साथ है। बच्चों की पढ़ाई को लेकर कोई चर्चा नहीं है। पेट्रोल डीजल मंहगा करके गृहणियों की जेब पर डाका डाला गया है। क्योंकि अगर ईंधन मंहगा हो गया तो सब चीजें मंहगी होंगी। आपके एक लाख रुपये के लोन से कौन सा व्यापार होगा। सेवाओं की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं है। इससे सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसा बजट है।
(रीना सिंह पूर्व अपर महाधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट)