अंतरिम बजट पेश होने से महज 24 घंटे पहले वाणिज्य मंत्रालय ने मीडिया से कहा कि इसे अंतरिम बजट न माना जाए। यह पूर्ण बजट ही होगा। हल्ला मचने पर देर शाम को वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम बजट ही होगा। लेकिन शुक्रवार सुबह जब वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने बजट पेश करना शुरू किया तो पता चला कि यह तो पूर्ण बजट जैसा ही था।
इसी तरह राष्ट्रीय गोकुल आयोग की स्थापना कर ७५० करोड़ रुपये की धनराशि के जरिए राष्ट्रीय कामधेनु मिशन के तहत गौमाता की रक्षा का प्रण किया। यह भाजपा और संघ परिवार के हिंदुत्व के एजेंडे के एजेंडे को बढाने वाला फैसला है।
अपने भाषण में गोयल ने कहा कि उनकी सरकार स्पष्ट नीति, साफ नीयत और अटल निष्ठा का पालन करती है। इसके जरिए उन्होंने चुमाव में भावनात्मक लाभ उठाने के लिए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद दिलाई।
केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने एक ओर जहां मोदी सरकार का पांच साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया वहीं लोकलुभावनी घोषणाओं के जरिए डेढ़ महीने बाद होने वाले आम चुनाव के लिए वोटों पर निशाना साधा।
उन्होंने न सिर्फ आयकर में छूट की सीमा दोगुनी कर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को ख़ुश कर दिया वहीं किसानों और मज़दूरों के लिए घोषणा कर एक बड़े वोटबैंक के साधने का प्रयास किया। साथ ही दस सालों का ख़ाका खींचकर यह आभास दिया कि वे 2019 ही नहीं बल्कि मिशन 2029 की तैयारी कर रहे हैं।
वित्त मंत्री ने अगले 10 सालों के विकास का खाका खींच कर न सिर्फ ख़ुद को आत्मविश्वास से भरपूर दिखाया, साथ ही लोगों की उम्मीदों को भी पंख लगा दिए। उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में 5 ट्रिलियन डॉलर(3600 करोड़ रुपए) की और 8 सालों में 10 ट्रिलियन डॉलर (यानी 7200 करोड़ रुपए) की अर्थव्यवस्था बन जाएगी। उन्होंने इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जरूरी क़दमों का भी उल्लेख किया।