वित्त मंत्री ने बताया कि देश में नई डिजिटल तकनीक जैसे मशीन लर्निंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के विकास और उसे अपनाने के लिए वित्त मंत्रालय विज्ञान एवं तकनीकी विकास विभाग के लिए डिजिटल इंडिया के तहत फंड बढ़ाकर 3073 करोड़ कर रहा है। डिजिटल इंडिया योजना के साथ सरकार डिजिटल बदलाव पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे तकनीकी लाभ के जरिए देश को एक नया आकार देकर सशक्तीकरण किया जा सके।
नीति आयोग का एआई प्रोग्राम
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार का थिंक टैंक नीति आयोग जल्द ही एक राष्ट्रीय योजना लांच करेगा इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधित शोध एवं विकास और इसके एप्लिकेशन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वहीं विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग रोबोटिक्स, एआई, डिजिटल उत्पादन और डाटा विश्लेषण और इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर एक मिशन की शुरुआत करेगा। उन्होंने बताया कि एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदल रही है। जेटली के मुताबिक डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं देश में खुद को ज्ञान और डिजिटल सोसाइटी के रूप में स्थापित हो रही हैं।
साइबर तकनीक पर ध्यान
बजट में साइबर तकनीक का जिक्र करते हुए सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाने की बात कही गई है। यह सेंटर नई तकनीक जैसे एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डॉटा और ब्लॉकचेन पर काम करेंगे।
चेन्नई में 5-जी सेंटर
नई तकनीक को बढ़ावा देने, खासकर 5-जी तकनीक और उसे अपनाने के लिए टेलीकॉम मंत्रालय आईटी मद्रास के साथ मिलकर चेन्नई में 5-जी सेंटर स्थापित करेगा।
बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी गैरकानूनी करार
सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी का विरोध किया है क्योंकि इसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग में हो सकता है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी नहीं मानती है। हम इसके गैरकानूनी इस्तेमाल को रोकने के लिए हर कदम उठाएंगे। आरबीआई पहले ही इसे गैरकानूनी करार दे चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्चुअल करेंसी संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई थी। समिति रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है और उसे जांचा भी जा चुका है।