बीएसएफ प्रवक्ता के अनुसार, हमारे जवान जहां पर भी तैनात हैं, वहां अपने आसपास रहने वाले लोगों को कोरोना से बचाव की जानकारी देते हैं। बीएसएफ परिसर के सामने से अनेक ट्रक गुजरते हैं। बीएसएफ के अधिकारियों को पता चला कि इन ट्रक चालकों के पास खाने पीने का कोई जरिया नहीं है।
इसके बाद जवानों ने अपने परिसर के सामने वाली सड़क पर ट्रकों को रूकवाना शुरू कर दिया। सबसे पहले ड्राइवरों को सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब बताकर उन्हें कतार में खड़ा किया जाता है। इसके बाद एक-एक कर उनके हाथ साबुन से धुलवाए जाते हैं।
उन्हें चाय देते हैं और उसके बाद खाना खिलाया जाता है। जब वे वहां से जाने लगते हैं तो उन्हें पांच मिनट के लिए बीएसएफ के अधिकारी कोरोना से बचाव के बारे में समझाते हैं। चूंकि ट्रक के माल को चढ़ाना और फिर उतरवाना, ऐसे में उन्हें कई लोगों के संपर्क में आना पड़ता है।
इसके लिए उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब बताकर मास्क और दस्ताने दे दिए जाते हैं।
सीमा सुरक्षा बल के सेक्टर हेड क्वार्टर फाजिल्का और 96 बटालियन फाजिल्का ने राष्ट्रीय राजमार्ग 9 (जो राजस्थान और पंजाब जम्मू इत्यादि राज्यों को जोड़ती है) पर सबसे पहले ये प्रयोग किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।
इसके बाद दूसरी जगहों पर भी ट्रक चालकों को खाने पीने की मदद देनी शुरू कर दी गई। लॉकडाउन में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को बरकरार रखने के लिए लगातार काम कर रहे इन ट्रक ड्राइवरों को जब बीएसएफ से ये मदद मिलती है तो उनके चेहरे खिल उठते हैं।