भारत से लगती पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर लोगों के पलायन की स्थिति गंभीर है। एक तरफ भारत के सीमावर्ती इलाकों से लोग पलायन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर पड़ोसी मुल्क अपने सीमा क्षेत्र में जनसंख्या बढ़ा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री नित्यानंद राय ने इस पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, सरकार अपने स्तर पर पलायन को रोकने का हर संभव प्रयास कर रही है। पलायन, कुछ कम भी हो रहा है। बॉर्डर एरिया से पलायन का क्या कारण है, इस बाबत स्थानीय लोग ही बेहतर जानते हैं। विभिन्न इलाकों में पलायन के कारण भी अलग अलग हैं।
नित्यानंद राय ने कहा, दिक्कत ये है कि कई जगहों पर कुछ दिन के लिए लोग सीमावर्ती क्षेत्रों से दूर चले जाते हैं और उसके बाद अनेक व्यक्ति वापस नहीं लौटते। वे उस इलाके में रहने लगते हैं, जहां पर बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं। पड़ोसी मुल्क, अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा आबादी बढ़ा रहा है। ऐसा नहीं है कि भारत सरकार ने बॉर्डर एरिया के लिए कुछ नहीं किया। वहां पर लोगों का जीवन स्तर उच्च करने के लिए विकास की अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने नवम्बर, 2020 में गुजरात के धोरडो (कच्छ) में आयोजित सीमांत क्षेत्र विकासोत्सव को संबोधित करते हुए कहा था कि सीमावर्ती गांव में रहने वाले नागरिकों को उतनी सुविधा मिलनी चाहिए, जितनी हमारे शहरों में रहने वाले नागरिकों को मिलती हैं।
बॉर्डर एरिया के कई इलाके तो कठिन परिस्थितियों वाले हैं। किन्हीं कारणों से वहां पर बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही। ऐसे में लोगों के पलायन को रोकने में सरकार नाकामयाब रही है। जो लोग बॉर्डर एरिया में रह रहे हैं, वे बहादुर हैं। वे देशभक्त हैं। अब सरकार उन्हें हर संभव सुविधा मुहैया कराने का प्रयास कर रही है। इसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की बड़ी भूमिका है। ये बल इन इलाकों में सिविक एक्शन प्रोग्राम चलाते हैं। सरकार वहां के लोगों की जरूरत और स्वभाव को समझ रही है। वहां के लोग कई कार्यों के हुनरमंद हैं। इसका लाभ उठाकर उनका जीवन संवारा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा सीमा प्रबंधन को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए सीमा सुरक्षा की अवधारणा को पुनः परिभाषित किया जा रहा है। स्थानीय जनसंख्या को इसके केंद्र में रखा जा रहा है।
नित्यानंद राय के मुताबिक, ऐसे सीमावर्ती गांव, जहां जनसंख्या बहुत ही कम है और सीमित कनेक्टिविटी तथा बुनियादी सुविधाओं की वजह से वे विकास के लाभ से वंचित रह गए हैं। उत्तरीय सीमा के ऐसे ही गावों को नए 'वाइव्रेंट विलेजेज कार्यक्रम' के अंतर्गत लाया जाएगा। यहां के क्रियाकलापों में गांव की बुनियादी सुविधाओं, आवास, पर्यटन केंद्रों के निर्माण, सड़क संपर्क, विकेंद्रित नवीकरणीय ऊर्जा की व्यवस्था है, दूरदर्शन और शिक्षण चैनलों के लिए 'डाइरेक्ट टू होम एक्सेस' की व्यवस्था एवं आजीविका सृजन के लिए सहायता जैसे कार्य किए जाएंगे। इन क्रियाकलापों के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध कराया जाएगा। उनकी लगातार मॉनिटरिंग भी की जाएगी। सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी कई स्थानों पर सरकार के एकमात्र प्रतिनिधि हैं, जिनका सीमावर्ती जनसंख्या के साथ सीधा संबंध है। सीमा सुरक्षा बल के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह स्थानीय लोगों के योगदान को पहचानते हुए उनके हितों का भी ध्यान रखे और उनके जीवन को बेहतर करने का प्रयास करें।