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BSF: बीएसएफ आज मना रहा है 60वां स्थापना दिवस , बंगाल में 2024 में अब तक 120 करोड़ रुपए का सोना-चांदी जब्त किया

सार

बीएसएफ का दक्षिण बंगाल सीमान्त पश्चिम बंगाल के जिला दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद व मालदा के संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण इलाके में बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है।
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बीएसएफ - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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मातृभूमि की रक्षा के लिए सदेव अग्रणी और देश की प्रथम रक्षा पंक्ति के रूप से प्रसिद्ध सीमा सुरक्षा बल (बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स) न सिर्फ भारत का एक प्रमुख सशस्त्र पुलिस बल है साथ ही दुनिया का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल भी है। बल का एक गौरवशाली इतिहास है और आज यानी 1 दिसंबर 2024 को गर्व से अपना 60वां स्थापना दिवस मना रहा है। बीएसएफ के दक्षिण बंगाल सीमान्त के अंतर्गत पश्चिम बंगाल में 913 किलोमीटर लंबी सीमा आती है।
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1 दिसंबर. 1965 को हुआ था गठन
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान प्राप्त अनुभवों व देश की सीमाओं की  रक्षा  को और अधिक दृढ़ करने के लिए, 01 दिसंबर 1965 को गठित, बीएसएफ की स्थापना भारत की
सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष, केंद्रीय रूप से नियंत्रित बल के रूप में की गई थी। इसके प्रथम प्रमुख और संस्थापक श्री के.एफ. रुस्तमजी, आई.पी. थे। प्रारंभ में 1965 में, बी.एस.एफ. की स्थापना 25 बटालियनों के साथ की गई थी और समय बीतने के साथ, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व क्षेत्र आदि में उग्रवाद के खिलाफ लड़ने के लिए राष्ट्र की आवश्यकता के अनुसार इसका विस्तार किया गया। वर्तमान में बी.एस.एफ. में 192 (4 एन.डी.आर.एफ. सहित) बटालियन और सात बी.एस.एफ. आर्टी रेजिमेंट हैं जो पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा की रक्षा करते हैं। इसके अलावा, बी.एस.एफ. कश्मीर घाटी में घुसपैठ विरोधी भूमिका, उत्तर-पूर्व क्षेत्र में उग्रवाद पर नियंत्रण, ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में नक्सल विरोधी अभियान और पाकिस्तान और बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर एकीकृत चेक पोस्टों की सुरक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
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पश्चिम बंगाल में 913 किलोमीटर लंबी सीमा के संरक्षक
बीएसएफ का दक्षिण बंगाल सीमान्त पश्चिम बंगाल के जिला दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद व मालदा के संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण इलाके में बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। इस सीमान्त में 4 क्षेत्रीय मुख्यालय  और 20 बटालियनों के अंतर्गत आने वाले सीमा क्षेत्रों में विशेषता चुनौतीपूर्ण सुंदरबन क्षेत्र, नदीय इलाके, चर वाले इलाके व घनी आबादी वाले गांव और बिना बाड़ वाले क्षेत्र आते हैं, जो इसे निगरानी के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक बनाते हैं। बीएसएफ जवानों के अथक प्रयासों ने इस महत्वपूर्ण सीमा पर शांति, सुरक्षा और अखंडता कायम है।
वर्ष 2024 की प्रमुख उपलब्धियां :-
सोने और चांदी की तस्करी: तस्करी नेटवर्क को 120 करोड़ रुपए का झटका 2024 में, BSF साउथ बंगाल फ्रंटियर ने तस्करी गतिविधियों को विफल करने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की, जिसमें ₹118.63 करोड़ मूल्य का 170.48 किलोग्राम सोना और ₹1.15 करोड़ मूल्य का 159 किलोग्राम चांदी जब्त किया गया। कुल 105 सोने की तस्करी के मामलों का पर्दाफाश किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 86 भारतीय और 32 बांग्लादेशी तस्करों को गिरफ्तार किया गया। तस्करों ने शरीर में, वाहनों की केविटी, जूतों के तल्लो, खेती बाड़ी वाले औजारों में सोना छिपाने सहित अन्य नए नए तरीकों का इस्तेमाल किया, लेकिन BSF के इंटेलीजेन्स नेटवर्क और जवानों की सतर्कता ने उनके  हरएक प्रयासों को विफल कर दिया। यहां तक कि पेस्ट के रूप में सोने की तस्करी को भी नाकाम कर दिया गया, जिससे BSF की तकनीकी और सामरिक श्रेष्ठता की पुष्टि हुई।

ड्रग्स के खिलाफ जंग: मादक पदार्थों की तस्करी हुई कम 
बीएसएफ दक्षिण बंगाल सीमान्त ने नशीली दवाओं के खतरे के खिलाफ अपनी अथक लड़ाई लगातार जारी रखी है। वर्ष 2024 में विभिन्न ऑपरेशन के तहत निम्नलिखित जब्त किए गए:
-1,73,628 बोतलें फेंसेडिल, जिनकी कीमत 3.62 करोड़ रुपए है,
-1,223 किलोग्राम गांजा,
-69,702 याबा टैबलेट, जिनकी कीमत  6.95 करोड़ है रुपए और 17.5 किलोग्राम मादक पदार्थ पाउडर। साथ ही 51 तस्करों (41 भारतीय और 10 बांग्लादेशी) की गिरफ्तारी ने सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों को एक बड़ा झटका दिया है।


घुसपैठ पर प्रभावी लगाम-
नदी के किनारे और बिना बाड़ वाले इलाकों के बावजूद, बीएसएफ ने अवैध सीमा पार से घुसपैठ से सफलतापूर्वक निपटा है। सीसीटीवी कैमरे, पीटीजेड कैमरे और ड्रोन सहित उन्नत निगरानी प्रणालियों का उपयोग करते हुए, सीमांत क्षेत्र ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस फॉर वलनरबल पैचेज (ईएसवीपी) पहल के तहत एक मजबूत निगरानी तंत्र विकसित किया है। इस वर्ष, बीएसएफ ने 1,742 घुसपैठियों (1,301 बांग्लादेशी और 441 भारतीय) को पकड़ा, जिनमें 39 घुसपैठ में  मदद करने वाले दलाल शामिल है। इन प्रयासों ने अवैध घुसपैठ को काफी सीमा तक  नियंत्रित किया है और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। इसके अलावा मानव तस्करी और वन्यजीव बचाव में भी  दक्षिण बंगाल सीमांत के अधीन कार्यरत यूनिटों का योगदान सराहनीय रहा है। क्षेत्र की मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (एएचटीयू) ने अनेक बांग्लादेशी और भारतीय महिलाओं  को मानव तस्करी के कुत्सित नेटवर्क से मुक्त करने में सफल रही है। इसके अतिरिक्त, पेरूवियन अल्पाका और चीनी गोल्डन तीतर सहित 800 से अधिक लुप्तप्राय प्रजातियों को तस्करों से बचाया गया और पुनर्वास के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया।
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सीमा समुदायों को सशक्त बनाना:
प्रगति के लिए एक बल , बीएसएफ दक्षिण बंगाल सीमांत क्षेत्र, सीमावर्ती समुदायों के समग्र उत्थान के लिए अपने कर्तव्यों से आगे जाकर  काम करती रही है और उनके विकास और कल्याण को सुनिश्चित किया है। प्रमुख पहलों में शामिल हैं: युवाओं के लिए कौशल विकास: स्थानीय युवाओं को केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल में रोजगार दिलाने में मदद करने के लिए सीमा  सुरक्षा बल  नियमित रूप से लिखित और शारीरिक परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है। इन प्रयासों से सैकड़ों उम्मीदवारों को लाभ हुआ है, जिससे सशस्त्र बलों में करियर बनाने का उनका मार्ग प्रशस्त हुआ है। सीमा दर्शन कार्यक्रम: इस जागरूकता कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को बीएसएफ के संचालन और बुनियादी ढांचे से परिचित कराया जाता है। ये यात्राएँ राष्ट्रीय सुरक्षा में बीएसएफ की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करते हुए छात्रों में राष्ट्र के प्रति प्रेरणा और गर्व पैदा करती हैं। ज़रूरतमंद समुदायों के लिए चिकित्सा शिविर: बीएसएफ ने कई चिकित्सा शिविर आयोजित किए हैं, जो दूरदराज के सीमावर्ती गाँवों में वंचित आबादी को मुफ़्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान करते हैं। ये शिविर जीवन रक्षक उपचार और दवाइयाँ प्रदान करते हैं, जिससे सीमावर्ती निवासियों की भलाई में काफ़ी सुधार होता है। वर्ष 2024 में आयोजित मेडिकल कैम्प्स में 9125 सीमावर्ती लोगों का निशुल्क इलाज व दवाईयां वितरित की गयी।

भारत-बांग्लादेश संबंधों को मज़बूत बनाना-
प्रभावी सीमा प्रबंधन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के अनुरूप, BSF दक्षिण बंगाल फ्रंटियर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी ) के साथ मज़बूत द्विपक्षीय संबंध बनाए रखता है। 2024 में, बीएसएफ और बीजीबी ने 1 महानिरीक्षक-स्तरीय बैठक, 3 DIG-स्तरीय बैठकें, और 23 कमांडेंट-स्तरीय चर्चाएँ। ये बातचीत विश्वास, सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देती हैं, जिससे सीमा सुरक्षा और भी बेहतर होती है। बीएसएफ दक्षिण बंगाल फ्रंटियर ने अद्वितीय सफलता के एक वर्ष का समापन किया है औऱ इस अवधि की अक्षुण्ण सीमा, सीमा क्षेत्रों में  शांति और अपराधों की रोकथाम में प्राप्त उपलब्धि बल की अटूट सतर्कता, बहादुरी और देश के प्रति पूर्ण समर्पण को प्रदर्शित करता है। सीमा सुरक्षा बल का आदर्श वाक्य " जीवन प्रयंत कर्त्तव्य " है और बल हमेशा इस पर खरी उतरी है।
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