सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने आगामी महीनों में घुसपैठ की बढ़ने वाली कोशिशों को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है और इससे निपटने के लिए रणनीति भी तैयार कर ली है। भारत-पाकिस्तान की निगरानी में तैनात बल ने यह कदम सीमा पार आतंकी कैंपों में घुसपैठ के लिए सुरंगों के इस्तेमाल की आतंकियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण को देखते हुए उठाया है।
बीएसएफ ने भारत पाकिस्तान से लगती सीमा पर सुरंग संभावित इलाकों की भी पहचान की है और इन इलाकों में शारीरिक के साथ ही तकनीक आधारित गश्त भी बढ़ा दी है। बल ने सीमा पर करीब 18 जगहों की पहचान की है।
इस संदर्भ में पिछले हफ्ते दिल्ली में बीएसएफ के शीर्ष अधिकारियों की एक बैठक भी हुई। शारीरिक गश्त के साथ ही जमीन को खोदने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया है। साथ ही राडार की भी मदद ली जा रही है। बीएसएफ में शीर्ष सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकी गुटों द्वारा बनाई गई सुरंगें अभी भी मौजूद हैं और सुरंग विरोधी अभियान शुरू किया गया है।
एक वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि पिछले छह महीने में लगभग हर 40वें दिन हमने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक सुरंग का पता लगाया। ये सुरंगें काफी साल पहले बनाई गईं थीं। इसके बाद से आतंकी घुसपैठ के लिए अन्य रास्ते अपना रहे हैं।
हालांकि अभी भी उनके लिए सुरंग के जरिये घुसपैठ करना सुरक्षित रास्ता है। हमने सुरंग विरोधी अभियान शुरू किया है और सुरंग संभावित इलाकों की पहचान की है जिनका इस्तेमाल घुसपैठ के लिए किया जा सकता है।
जवानों की तैनाती की गई
दिल्ली में पिछले हफ्ते हुई बैठक में बीएसएफ अधिकारियों ने घुसपैठ के खिलाफ उठाए गए कदमों और अगले कुछ महीनों के लिए योजना की जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे इनपुट हैं कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी न होने के चलते आतंकी घुसपैठ के लिए अलग रास्ता चुन सकते हैं।
व्यापक इलाकों को चिह्नित किया गया है और इस पर निगरानी के लिए जवानों की तैनाती की गई है। साथ ही राडार भी लगाए गए हैं।
जनवरी में यहां मिली सुरंग
बीएसएफ ने इस साल जनवरी में जम्मू के पंसार में एक सुरंग का पता लगाया था। यह सुरंग 150 मीटर लंबी और 30 फीट गहरी थी। बाद में पता चला कि सुरंग पाकिस्तान की ओर से शुरू हो रही थी।
पाकिस्तानी क्षेत्र में जाकर सुरंग का लगाया पता
सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की ओर करीब 200 मीटर जाकर एक सुरंग का पता लगाया था। इसका इस्तेमाल भारत में घुसपैठ के लिए आतंकवादी कर रहे थे।