विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पार्टी ने शुक्रवार को मांग की कि हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास की 400 एकड़ जमीन को एक निजी बैंक पास गिरवी रखकर 10 हजार करोड़ रुपये जुटाने के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) जैसी एजेंसियों से करवाई जाए। पार्टी का आरोप है कि इस मामले में कांग्रेस सरकार के समय बड़ी अनियमितताएं हुई हैं।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि इस जमीन गिरवी मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक सांसद भी शामिल है और वह मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की सरकार की लेन-देन के बदले मदद कर रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले को एक बड़ा वित्तीय घोटाला बताया।
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केंद्रीय एजेंसियों से करवाई जाए मामले की जांच: केटी रामा राव
उन्होंने कहा, हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार इस मामले की जांच आरबीआई, सीबीआई, एसएफआईओ या सीवीओ जैसी एजेंसियों से करवाए। अगर केंद्र हमारी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं करता, तो इसे ऐसा माना जाएगा कि कांग्रेस सरकार और केंद्र सरकार दोनों मिलीभगत से यह काम कर रहे हैं। रामा राव ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) और प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) से भी मुलाकात करेगी और उन्हें पूरे मामले की जानकारी देगी।
आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर आरोप लगा रहे बीआरएस नेता: कांग्रेस
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने केटीआर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीआरएस नेता आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर बोल रहे हैं और सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बीआरएस और भाजपा आपस में मिली हुई हैं और मिलकर हैदराबाद विश्वविद्यालय की जमीन के मुद्दे को जानबूझकर विवादित बना रहे हैं, ताकि कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए ऐतिहासिक पिछड़े वर्ग के सर्वेक्षण से ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने कहा, मैं केटीआर से पूछता हूं- आपके शासन में हैदराबाद और उसके आसपास कितने हजार एकड़ जमीन बेची गई? कितनी जमीन आपके समर्थकों को दी गई? कितने जंगल काटे गए? लोग वो दिन नहीं भूले हैं।
बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि तेलंगाना औद्योगिक अवसंरचना निगम (टीजीआईआईसी) ने जो 400 एकड़ जमीन आईसीआईसीआई बैंक के पास गिरवी रखी है, वह असल में उसकी है ही नहीं, क्योंकि राज्य सरकार ने वह जमीन टीजीआईआईसी को कभी आधिकारिक रूप से सौंपी ही नहीं।
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केटीआर ने कहा, आरोप बहुत सीधा है। टीजीआईआईसी ने जो 400 एकड़ जमीन गिरवी रखी है, वह उसकी खुद की जमीन नहीं है। उनके पास न तो मालिकाना हक है, न ही कोई दस्ताव कि यह जमीन उनकी है। फिर भी उन्होंने 10 हजार करोड़ रुपये लिए। इस पूरी धोखाधड़ी में आईसीआईसीआई बैंक भी शामिल है, जिसने इतना बड़ा लेन-देन किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को भी करनी चाहिए, क्योंकि लेन-देन में शामिल एक लिस्टेड कंपनी भी शामिल है।
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