बीआरओ ने तैयार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क,
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चीन से गतिरोध के बीच भारत ने एक और कामयाबी हासिल करते हुए लेह तक जाने वाली तीसरी सड़क बना ली है। खास बात यह है कि निम्मू-पदम-दारचा नाम की इस सड़क से होने वाली सैन्य गतिविधियों को अब चीन जैसे दुश्मन भांप भी नहीं पाएंगे। सीमा सड़क संगठन द्वारा बनाई गई यह रणनीतिक सड़क पहले की दो अन्य सड़कों के मुकाबले काफी अहम है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास होने के चलते बीआरओ द्वारा बनाई गई बाकी की दो अन्य सड़कों श्रीनगर-कारगिल-लेह और मनाली-सारचू-लेह पर दुश्मनों की नजर रहती है।
भारत ने दारचा और लेह को जोड़ने वाले हाइवे का काम बहुत जल्दी पूरा कर लिया है। इस रास्ते से सैनिकों के लिए रसद और हथियार पहुंचाने में काफी आसानी होगी। इस हाइवे से कारगिल क्षेत्र में भी पहुंच आसान हो जाएगी। 16 सीमा सड़क कार्यबल के कमांडर और सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर एमके जैन ने बताया कि निम्मू-दारचा-लेह को जोड़ने वाला हाइवे जल्द ही शुरू हो जाएगा।
258 किमी लंबे इस हाइवे से मनाली से लेह जाने में करीब 5-6 घंटे की बचत होगी। वहीं, पहले की दो सड़कों से मनाली से लेह जाने में तकरीबन 12-14 घंटे लगते थे। इस तीसरी सड़क को साल के 10-11 महीने खोला जा सकेगा। हाइवे के निर्माण में सिर्फ 30 किमी का काम ही बाकी है। सूत्रों के मुताबिक हिमाचल से लद्दाख तक एक और वैकल्पिक मार्ग को दोबारा खोलने का काम चल रहा है और यह 2022 तक चालू हो सकता है।
हथियारों और सैनिकों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होगी यह सड़क
यह हाइवे जोजिला दर्रे से हथियारों, रसद और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होगी, जो द्रास-कारगिल होते हुए लेह तक जाएगी। इसी रास्ते से सटी पहाड़ियों सेे 1999 में कारगिल की जंग के दौरान पाकिस्तानी सेना लगातार बमबारी और गोलाबारी कर रही थी। अब ऐसी किसी नापाक हरकत पर लगाम लग सकेगी।