गुलेल की तरह बरसाए गोले
मेजर जनरल लखविंदर सिंह के अनुसार यहां नई चुनाती, दुश्वारियां सब मौजूद थी, इसलिए नए तरीके से ही हमला संभव था। हमने वही किया। छह बोफोर्स तोपें तैनात करने और उनसे गुलेल की तरह सीधे लक्ष्य पर गोले दागने का निर्णय लिया। इसके चारो तरफ 56 गन लगाई कवर फायर देने के लिए। इंफैंट्री पहले ही चाह रही थी कि आर्टिलरी की सहायता मिले।
ग्रिनेडियर विंग भी कुछ खास नहीं कर पा रही थी। मुझे भी इस नए प्रयोग के लिए सबको विश्वास में लेने में मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन जब फायर शुरू हुआ तो असर दिखने लगा। हमने दुश्मन की बातचीत इंटरसैप्ट कराई। वह अपने आकाओं से गुहार लगा रहे थे। वह कह रहे थे हमें बचाओ, यहां से निकालो, यहां तो कहर बरस रहा है। मेजर जनरल के अनुसार इसके बाद तो हमारा हौसला बढऩा तय था।
अप्रत्याशित निर्णय था
युद्ध की जमीन में कभी भी ऊंचाई वाली स्थिति से सैनिक पीछे नहीं लाए जाते। तोललिंग पहाड़ी पर हमारे सैनिक दुश्मन से कोई 200-250 फीट नीचे थे। लेकिन हमें अगली फायरिंग के लिए इन्हें नीचे उतारना था। हमारे इस निर्णय पर सैन्य कमांडर बमुश्किल माने। मैजर जनर के अनुसार मैनें उन्हें भरोसा दिलाया कि हमारी ब्रिगेड तोललिंग को जीतकर देगी।
बताते हैं काफी मशक्कत के पास भारतीय सैनिकों को छह सौ गज पीछे हटने को कहा गया। इसके बाद चारों तरफ से सीओ, जेसीओ को लगाकर 56 गन से इंडायरेक्ट(परोक्ष) फायरिंग शुरू कराई। इसके साथ-साथ छह बोफोर्स तोपों ने डायरेक्ट(गुलेल की तरह सीधे) फायरिंग(गोले उगलने शुरू किए) शुरू की। नतीजा सामने था। हमारे सैनिकों ने पहली पोस्ट तोललिंग पर कब्जा कर लिया।
इतिहास में नहीं हुई ऐसी फायरिंग
तोप से हमले के इतिहास में इतना सीधी फायरिंग आज तक नहीं हुई है। दुनिया के सैन्य इतिहास में यह अनूठा प्रयोग था। हमने इसे एक सिद्धांत के आधार पर अपनाया था। मेरा इस सिद्धांत के आधार पर अनुमान था कि यदि तोप की ऊंचाई का आधार लक्ष्य ऊंचाई के अनुपात में सीधा(बराबर) हो तो डायरेक्ट फायरिंग काफी प्रभावी होती है। बस इसी रणनीति के कुशलता से इस्तेमाल ने हमें वह दे दिया, जिसकी हम उम्मीद नहीं कर सके थे।
इसके बाद तो हमारा हौसला काफी बढ़ गया। हमारे जवानों का हौसला काफी बढ़ गया। इसकी आज भी दुनिया में तारीफ होती है। भारतीय सैन्य इतिहास में इस प्रयोग को दर्ज कर लिया गया है। अमेरिका आदि के विशेषज्ञ भी मानने लगे कि कारगिल जैसे दुरुह ठिकाने को इंफैंट्री और आर्टिलरी ने बहादुरी, रणनीति और कौशल से अपने कब्जे में ले लिया।