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ब्रिक्स समिट में मोदी-पुतिन दूर करेंगे गिले शिकवे 

Sat, 15 Oct 2016 03:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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d - फोटो : Getty images
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भारत की अमेरिका और उसके मित्र देशों से बढ़ी नजदीकियों के बीच रूस की पाकिस्तान के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास से भले ही कयासों का दौर शुरू हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रूस भारत की कीमत पर पाकिस्तान से नजदीकियां नहीं बढ़ाएगा। ब्रिक्स समिट और इसके इतर भारत-रूस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन अपने गिले शिकवे दूर कर लेंगे। वैसे भी भारत ने रूस की नाराजगी दूर करने के लिए जहां कई अहम रक्षा समझौतों को अमली जामा पहनाने का साफ संदेश दिया है, वहीं माना जा रहा है कि भारत अमेरिका की तर्ज पर रूस के साथ भी लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौते को अमली जामा पहना सकता है। इसके तहत रूस को भी भारत में मिलिट्री हार्डवेयर बनाने की अनुमति मिलेगी।
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रूस-भारत संबंधों के विशेषज्ञ और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरुण मोहंती कहते हैं निश्चित रूप से 2006 से ही भारत की अमेरिका और उसके करीबी देशों से भारत की बढ़ती करीबी से रूस नाराज है। हालांकि यह नाराजगी इतनी बड़ी नहीं है कि वह भारत की कीमत पर पाकिस्तान को तरजीह दी। पाकिस्तान के संदर्भ में रूस की अपनी भी कुछ रणनीतिक मजबूरियां हैं। आज की तारीख में अमेरिका, फ्रांस सहित कई देशों की पाकिस्तान में सैन्य पहुंच है। अफगानिस्तान मामले में घिरे रूस को भी पाकिस्तान की दरकार है। ऐसे समय में जब भारत रूस के धुरविरोधी अमेरिका के करीब हो रहा है तो पाकिस्तान के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास की घोषणा केजरिए रूस ने खुद के नाराज होने का इशारा किया है। हालांकि इस युद्घाभ्यास का महज सांकेतिक महत्व इसलिए है कि इसमें दोनों देशों के महज 100-100 सैनिक ही हिस्सा लेंगे।

यही कारण है कि रूस की नाराजगी दूर करने के लिए भारत ने पुतिन के दौरे के क्रम में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई अहम समझौतों को अमलीजामा पहनाने की तैयारी की है। इनमें 200 कामकोव केए 226टी हल्के हेलीकॉप्टरों का निर्माण, 5वीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट या परसेक्टिव मल्टी रोल फाइटर (पीएमएफ) समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के संकेत मिल रहे हैं।
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