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दुख की घड़ी में पंकजा मुंडे ने दिया भाई को सहारा

Sat, 15 Oct 2016 03:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,मुंबई
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पंकजा मुंडे - फोटो : ANI
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महाराष्ट्र की राजनीति में अपने ही भाई की चुनौती झेल रही पंकजा मुंडे आखिरकार दुख की घड़ी में भाई धनंजय मुंडे का सहारा बनी। महिला व बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे का अपने भाई विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता चरम पर है लेकिन शुक्रवार को सारे गिले शिकवे भूलकर पंकजा मुंडे अपने बड़े पिता (दिवंगत गोपीनाथ मुंडे के भाई) पंडित अन्ना मुंडे के अंतिम संस्कार में शामिल हुईं और चचेरे भाई धनंजय मुंडे को सांत्वना दी।
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विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे भाजपा के लोकनेता रहे स्व. गोपीनाथ मुंडे के सगे भतीजे हैं। उनके पिता पंडित अन्ना मुंडे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बृहस्पतिवार की रात उनका निधन हो गया। शुक्रवार को बीड में उनका अंतिम संस्कार किया गया। गोपीनाथ मुंडे के जीवित रहते ही धनंजय मुंडे आपसी मनमुटाव के कारण भाजपा छोड़ एनसीपी में शामिल हो गए थे। इससे मुंडे परिवार में कलह शुरू हो गई थी। गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद दोनो भाई बहन के रिश्तों में और भी ज्यादा खटास आ गई। 

हाल ही में दशहरा के दिन भगवानगढ़ मंदिर के पुजारी और मुंडे परिवार के प्रिय रहे नामदेव शास्त्री महाराज ने पंकजा को भगवानगढ़ में भाषण करने से रोक दिया था और जिला प्रशासन ने भी उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी थी। भगवानगढ़ बंजारा समाज का पवित्र तीर्थस्थल है। यहां दशहरा के दिन लाखों की संख्या में पूरा समाज इकट्ठा होता है। इस बीच एक ऑडियो टेप सामने आया जिसमें पंकजा कथित रूप से भगवानगढ़ के पुजारी को धमका रही थी। इसे आपत्तिजनक बताते हुए धनंजय मुंडे ने तत्काल पंकजा मुंडे को मंत्रिमंडल से बहिष्कृत करने की मांग की थी। उधर, पुजारी शास्त्री के फरमान को पंकजा ने अपना अपमान समझा। उसके बाद भगवानगढ़ की बेटी बनकर पंकजा पूरे दलबल के साथ वहां पहुंची थी। भगवानगढ़ के बाहर सभा को संबोधित करते हुए पुजारी नामदेव शास्त्री पर आरोप लगाया था कि वे धनंजय मुंडे के इशारे पर काम कर रहे हैं। लेकिन, शुक्रवार को पंकजा ने पारिवारिक धर्म निभाया। धनंजय मुंडे के पिता के  अंतिम संस्कार में न सिर्फ पंकजा बल्कि उनकी मां और उनकी बहन सांसद प्रियतमा मुंडे भी भाई को सांत्वना देने पहुंची। 
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