लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को 13वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), चीन और ईरान के संसदीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में संसदीय सहयोग, द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
UAE के साथ डिजिटल तकनीक और व्यापार पर जोर
ओम बिरला ने यूएई की फेडरल नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष साकर घोबाश से मुलाकात के दौरान दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता का उल्लेख किया। उन्होंने नियमित संवाद, संसदीय आदान-प्रदान और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने के महत्व पर जोर दिया।
बैठक में डिजिटल संसद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), संसदीय समितियों के कामकाज और ऑनलाइन आश्वासन निगरानी प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा और युवाओं के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी विचार किया। साथ ही, कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
चीन के साथ सीमा पर शांति और संवाद की बात
चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के उपाध्यक्ष झेंग जियानबांग के साथ बैठक में बिरला ने कहा कि पड़ोसी देशों के रूप में भारत और चीन की जिम्मेदारी है कि वे सीमा पर शांति बनाए रखें। उन्होंने मतभेदों को बातचीत और आपसी सम्मान के जरिए सुलझाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में संसदीय आदान-प्रदान, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, तकनीक, व्यापार और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई। बिरला ने आपसी समझ को मजबूत करने में संसदीय मैत्री समूहों और ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना पर चर्चा
ईरान की इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के प्रेसीडियम के सदस्य अहमद नादेरी के साथ मुलाकात में बिरला ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के महत्व पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय बातचीत जारी रखने पर चर्चा की। नादेरी ने भारत की ओर से दवाइयां, सहायता और अन्य सहयोग उपलब्ध कराने के लिए आभार जताया।
वैश्विक चुनौतियों के हल में सांसदों को निभानी होगी सशक्त भूमिका: बिरला
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकालने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाने की आकांक्षा महज विमर्श तक सीमित रहने से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों व व्यावहारिक दृष्टिकोण को संकल्प के साथ जमीन पर उतारने से ही पूरी होगी।
बिरला ने कहा कि पूरी दुनिया इस समय क्षेत्रीय संघर्षों, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद व जलवायु परिवर्तन जैसी ऐसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इसका प्रभाव एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि इसका निदान संवाद, कूटनीति व आपसी सहयोग बढ़ाना है। ऐसे समय में विभिन्न देशों की संसद आपसी समझ और विश्वास को मजबूत करने और तनाव को कम करने के लिए शांतिपूर्ण समाधान में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया साझा हितों की पहचान करने के साथ परस्पर सहयोग से नए अवसर पैदा कर सकती है। बिरला ने कहा कि ब्रिक्स वैश्विक दक्षिण की आवाज को सशक्त बनाना चाहता है। इसके लिए हमें विमर्श के बाद बनी सहमतियों के आधार पर ठोस नीतियों, व्यावहारिक दृष्टिकोण को पूरी ईमानदारी से जमीन पर उतारना होगा।