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BRICS के हासिल: कई देशों के गिले-शिकवे दूर! स्मार्ट सिटी में एक-दूसरे की मदद, रोजगार मंच की पहल जैसी कई बातें

Mon, 14 Sep 2026 01:08 PM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो / एजेंसी।

सार

दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर बैठक कई मायनों में विशिष्ट रहा। कहना गलत नहीं होगा कि सभी देशों ने सर्वजन हिताय का साझा लक्ष्य तय किया है। समापन के मौके पर पीएम मोदी और जिनपिंग ने कहा कि ब्रिक्स का लाभ आम नागरिकों को मिलना चाहिए। दूसरी तरफ ईरान और यूएई भी अतीत की कड़वाहट भुलाने को तैयार हो गए हैं। वैश्विक नेता रिश्तों में गरमाहट लिए विदा हुए हैं। संगठन के सदस्य देशों का अगला शिखर सम्मेलन चीन में होगा। इस खबर में 12-13 जुलाई की झलकियां
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ब्रिक्स के मंच पर बढ़ी गर्मजोशी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एआई ग्राफिक्स
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स को सिर्फ सरकारों का मंच नहीं, बल्कि आम लोगों की तरक्की का माध्यम बनाने पर जोर दिया। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे और आखिरी दिन रविवार को दोनों नेताओं ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग का फायदा आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

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पीएम मोदी ने कहा, ब्रिक्स का सहयोग सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसमें उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों को भी शामिल किया जाए। इसके लिए उन्होंने डिजिटल कृषि से संबंधित ब्रिक्स नेटवर्क का जिक्र किया, जिसका उद्देश्य एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को किसानों की जरूरतों से जोड़ना है। पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों के शहरों के बीच बेहतरीन प्रैक्टिस साझा करने के लिए ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब बनाया गया है। इसका लाभ भी आम जनता को मिलेगा। स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है जो स्वच्छ ऊर्जा को ज्यादा प्रभावी और पहुंच योग्य बनाएगा। वहीं, जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों में स्मार्ट फैक्टरियों के विकास और इंजीनियर प्रशिक्षण गठबंधन, युवाओं के लिए वैज्ञानिक आदान-प्रदान शुरू करने का प्रस्ताव दिया। 

पीएम मोदी ने कहा : तकनीक व खनिज का प्रयोग हथियारों की तरह न हो
पीएम मोदी ने कहा, बढ़ते संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखला में अवरोध वैश्विक विकास के लिए गंभीर चुनौती हैं। दुर्लभ खनिजों और तकनीक को हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इन कदमों से दुनिया की तरक्की पर असर पड़ता है।
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एक का संकट दूसरे को भी प्रभावित करेगा: वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने दो-टूक कहा, दुनिया के देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। है। एक जगह पैदा संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है।

  • पीएम ने कहा, ब्रिक्स केवल देशों का एक समूह नहीं है, बल्कि समाधानों का एक तंत्र है। हमें उम्मीद है कि इस शिखर सम्मेलन में अपनाया गया नई दिल्ली घोषणापत्र हमारे साझा दृष्टिकोण और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा।

प्रधानमंत्री ने बताए सहयोग के चार स्तंभ

  1. लचीलापन : मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के लिए ब्रिक्स लॉजिस्टिक सप्लाई चेन बने। सामान की आवाजाही को ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत बनाने में सहयोग मिलेगा।
  2. नवाचार: ब्रिक्स देशों के स्टार्टअप को आपस में जोड़ने के लिए ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क बनाया जाए। ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड भी प्रस्ताव।
  3. स्थिरता: छोटे कारोवारों को मजबूती देने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई पोर्टल। ब्रिक्स कनेक्ट के माध्यम से कौशल, रोजगार व महिलाओं के लिए अधिक अवसर।
  4. सहयोग: ब्रिक्स देशों में संक्रामक बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम के लिए ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाने पर सहमति।

पीएम मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जिनपिंग बोले: फैसले ताकत से नहीं नियम से हों कानून सबके लिए बराबर
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा, वैश्विक मामलों में फैसले ताकत से नहीं होने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू हों। वैश्विक नियम सभी देशों की भागीदारी से बनें।

राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली सोच को बहुत पहले खारिज कर देना चाहिए था। नियमों के बिना दुनिया ऐसी है, जैसे बिना ट्रैफिक लाइट वाला चौराहा, जहां अराजकता व अव्यवस्था तय है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों में दोहरे मानदंड खत्म करने की जरूरत है। किसी देश के आकार, ताकत या संपदा के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। वैश्विक दक्षिण के देश कानून के शासन को बनाए रखने में मदद करें।

जिनपिंग ने बताए आगे बढ़ने के पांच सूत्र
  1. ओपन-सोर्स एआई समुदाय बनाया जाए, ब्रिक्स देश मिलकर एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करें।
  2. ब्रिक्स डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म बने। डिजिटल कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और औद्योगिक सहयोग बढ़ाएं।
  3. विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी और अगले वर्ष ब्रिक्स व्यापार सेवा मंच शुरू किया जाए।
  4. इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग सहयोग पहल के तहत चीन ब्रिक्स देशों में स्मार्ट फैक्टरियों के विकास में सहयोग करेगा।
  5. ब्रिक्स इंजीनियर प्रशिक्षण गठबंधन, युवाओं के लिए वैज्ञानिक आदान-प्रदान कार्यक्रम।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल) - फोटो : ANI
पुतिन का मत : नया स्वतंत्र बीमा तंत्र, ब्रिक्स का अनाज बाजार हो
पश्चिमी देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स देशों के लिए स्वतंत्र बीमा तंत्र और साझा अनाज बाजार बनाने का प्रस्ताव रखा है। पुतिन ने सदस्य देशों और वैश्विक दक्षिण से वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक समग्र और स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। बीमा को लेकर पुतिन का आह्वान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जी-7 देशों, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने पश्चिमी देशों की कंपनियों को रूसी कच्चे तेल को ले जाने वाले किसी भी जहाज का बीमा करने से तब तक रोक दिया है, जब तक कि तेल एक तय कीमत में या उससे कम पर न खरीदा गया हो। बीमा क्षेत्र से जुड़े इन प्रतिबंधों का रूसी कच्चे तेल के निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। इस दौरान पुतिन ने न्यू डेवलपमेंट बैंक के कामकाज की भी तारीफ की।

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन - फोटो : आईएएनएस-अमर उजाला ग्राफिक्स
ईरान-यूएई अतीत भूलने को तैयार: पेजेश्कियन
भारत की कूटनीति की एक और जीत के रूप में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव आने लगा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान की दिल्ली में आमने-सामने बातचीत के बाद दोनों देश संबंधों को फिर बेहतर करने पर सहमत हो गए हैं। पेजेश्कियन ने भारत यात्रा के समापन पर कहा, हम यूएई के साथ नई शुरुआत करना चाहते हैं। दोनों पक्ष अतीत को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर देखने पर सहमत हुए हैं। भारत में ईरान दूतावास ने यह बयान जारी किया।

यूएई के क्राउन प्रिंस के जाने के बाद पहुंचे सऊदी विदेश मंत्री
यूएई और सऊदी में तनाव के बीच यूएई क्राउन प्रिंस के रवाना होने के कुछ घंटे बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद शनिवार रात ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे। उन्होंने रविवार के आउटरीच सम्मेलन में हिस्सा लिया।

भारत की जमीन पर कई देशों ने दूर किए आपसी गिले-शिकवे...रिश्तों में बढ़ी गर्मजोशी; बंद कमरों में हुईं अहम बैठकें, सम्मेलन व डिनर में दिखी नजदीकी

ब्रिक्स का जो मंच भारत ने दिया उसका फायदा सदस्य देशों ने आपसी समझ बढ़ाने के लिए भी किया। सम्मेलन में तो भविष्य के समझौते और नीतियां तय होती रहीं लेकिन इसके इतर भी समूह के कई देश अपना एजेंडा लेकर आए थे। पूरे पारिवारिक माहौल में धुर विरोधी देशों ने आपस में बैठकें कीं।

सूत्रों के अनुसार यूएई और ईरान ने युद्ध के बीच पहली बार एक दूसरे के सामने बैठक की जिसमें क्षेत्रीय शांति और तनाव कम करने पर चर्चा हुई। यही नहीं समुद्री मार्गों की सुरक्षा बाधित न होने देने पर बात हुई। इनके अलावा रूस-चीन, रूस-ईरान, चीन-मलयेशिया के राष्ट्र प्रमुखों ने अलग-अलग बैठकें कर अपने एजेंडे पर बात की। इन द्विपक्षीय बैठकें से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में कारोबार से लेकर तनाव तक पर इसका असर दिख सकता है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद अल नहयान ने बैठक की थी। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक और सैन्य तनाव को कम करने और स्थिरता स्थापित करने पर गहन चर्चा की।

चीन-रूस ने स्थानीय मुद्राओं में भुगतान पर की बातचीत
सूत्रों के अनुसार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग व रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी वार्ता हुई। जिसमें अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ-प्रतिबंधों से निपटने, ब्रिक्स के भीतर स्थानीय मुद्राओं में भुगतान प्रणाली को तेज करने पर बात की।

रूस-ईरान में उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे पर चर्चा
रूस के राष्ट्रपति पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच चर्चा का केंद्र उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, ऊर्जा व्यापार व युद्ध संकट पर रणनीतिक तालमेल रहा। रूस-ईरान के बीच रक्षा और वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।  

चीन-मलयेशिया चीन सागर में शांति पर बात:
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने द्विपक्षीय बैठक में दक्षिण चीन सागर में शांति, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और आसियान को लेकर चर्चा हुई। 

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
ब्रिक्स शहरी अनुसंधान केंद्र बनेंगे और दूरस्थ रोजगार मंच तैयार होंगे
ब्रिक्स समूह के देश अब समावेशी, टिकाऊ, लचीले और स्मार्ट सिटी के निर्माण में एक दूसरे का सहयोग करेंगे। इसके लिए ब्रिक्स शहरी अनुसंधान एवं ज्ञान नेटवर्क व ब्रिक्स शहरी गतिशीलता केंद्र की स्थापना होगी। यही नहीं, दूरस्थ रोजगार के लिए अंतरराष्ट्रीय डिजिटल मंच स्थापित होगा। ब्रिक्स देशों ने तय किया है कि सुलभ, किफायती, समावेशी और स्मार्ट शहरी परिवहन समाधानों के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोग होगा। इसके लिए ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स आपूर्ति शृंखला तथा ब्रिक्स रेलवे अनुसंधान नेटवर्क भी बनेगा। ब्यूरो

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ऐतिहासिक वस्तुओं को उनके मूल देशों को वापस करेंगे
पुरावशेषों व ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली वस्तुओं को उनके मूल देशों को वापस करने पर जोर दिया गया है। कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के प्रशिक्षण होगा। सदस्य देशों के लिए प्रायोगिक आधार पर कलाकार रजिस्ट्री बनेगी। ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव से लेकर वेब बाजार ब्रिक्स थिएटर महोत्सव होंगे।
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अगले महीने होगा ब्रिक्स संसदीय मंच
अक्तूबर में 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच आयोजित होगा। इसमें महिला सांसदों की बैठक भी होगी। सदस्य देशों की संसदों के बीच संवाद और सहयोग मजबूत होगा। ब्रिक्स बिजनेस फोरम के अलावा ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच कारोबारी संपर्कों को और बढ़ाने के लिए ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल व ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन पर जोर दिया गया है।

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