एनएसजी पर ब्राजील-न्यूजीलैंड का विरोध भारत के लिए बड़ा झटका
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सदस्यता के अपने दावे पर परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) देशों की बैठक में तीन घंटे की चर्चा को भले ही भारत बड़ी उपलब्धि मान रहा हो, मगर इस मामले में चीन ने भारत को कूटनीति के हर मोर्चे पर कड़ी शिकस्त दी है। सदस्यता हासिल करने के मामले में भारत ने महज चीन को एकमात्र अवरोध मान कर बड़ी कूटनीतिक भूल की। इस होड़ में भारत ने खुद और अमेरिका-रूस सहित कई अन्य देशों के सहारे महज चीन को साधने पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखा।
इसके इतर चीन एनएसजी के अन्य सदस्य देशों को साधने की कूटनीतिक मुहिम चलाता रहा। इस क्रम में भारत के बेहद करीब और पांच देशों के समूह ब्रिक्स के सदस्य ब्राजील और न्यूजीलैंड को साध कर चीन ने बड़ा कूटनीतिक झटका दिया। सरकार के रणनीतिकार भी इस मामले में हुई कूटनीतिक चूक को दबे स्वर में स्वीकार कर रहे हैं।
एक वरिष्ठï सूत्र ने माना कि भारत ने अपनी कूटनीति के दायरे को महज चीन तक केंद्रित कर गलती की। दरअसल भारत को लगता था कि अमेरिका, रूस, फ्रांस जैसी ताकतों के भारत के साथ आने के बाद चीन के अलावा अन्य कोई सदस्य देश उसके दावे का विरोध नहीं करेगा।
यही कारण है कि भारत ने अपना कूटनीति का दायरा न सिर्फ चीन तक केंद्रित कर लिया, बल्कि अन्य ताकतवर देशों को भी चीन को ही साधने की मुहिम में लगा दिया। उक्त सूत्र के मुताबिक अन्य देशों के भी विरोध में उतर आने की भनक जब तक लगी तब तक बेहद देर हो चुकी थी। क्योंकि तब तक आस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की जैसे देश चीन के भारत द्वारा परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न किए जाने के तर्क का समर्थन करने के लिए तैयार हो चुके थे।
हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि भारत के दावे पर तीन घंटे चर्चा हुई। सदस्य देश एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों की सदस्यता पर भविष्य में भी चर्चा करने पर सहमत हुए। इस दौरान उन्होंने चीन का नाम लिए बिना कहा कि एक देश के अडिय़ल रवैये के कारण भारत एनएसजी की सदस्यता हासिल नहीं कर पाया।
Published By Rahul Sankrityayan