भारतीय रेलवे की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड ने गत पांच वर्षों में कामयाबी का नई इबारत लिखी है। इसे शून्य से शिखर की यात्रा की शुरुआत कह सकते हैं। यह सफलता कंपनी ने घाटे से उबरते हुए बीते पांच वर्षों में पाई है। यह दावा कंपनी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) यतीश कुमार ने बुधवार को यहां किया।
उन्होंने कहा, यह सफलता एक दिन और एक इंसान की मेहनत से नहीं बल्कि हजारों हाथ, हजारों लोगों के मिलकर कदम बढ़ाने, साथ देने और कुछ कर गुजरने के विश्वास से मिली है। इसके लिए उन्होंने पूरी टीम को बधाई दी। कहें तो यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का जीता-जागता उदाहरण बन गया है।
इन पांच वर्षों में कंपनी की तरक्की की कहानी उन्होंने कुछ इस तरह से बयां की। उन्होंने बताया कि 2017-18 तक ब्रेथवेट का कारोबार 120-150 करोड़ रुपये की सीमा में था।कंपनी 27.65 करोड़ के घाटे में चल रही थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कंपनी ने 36.5 प्रतिशत राजस्व वृद्धि के साथ 1043 करोड़ रुपये हासिल किए। उन्होंने कहा कि ब्रेथवेट का लक्ष्य अब वित्त वर्ष 2025-26 तक 2500 करोड़ रुपये का राजस्व कारोबार हासिल करना है। इसके साथ ही कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना है। उन्होंने दावा किया कि शीर्ष नेतृत्व में बदलाव के बाद पिछले पांच वर्षों में कोविड-19 के प्रभाव के बावजूद सभी क्षेत्रों में कंपनी ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। 2022 में मिनी रत्न श्रेणी-1 का दर्जा भी प्राप्त किया।
कुमार ने कहा, कंपनी शून्य से शिखर की ओर अग्रसर हुई है। कंपनी के पास फिलहाल 2,400 करोड़ का आर्डर है, जो अगले कुछ महीने में 4,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। मई 2018 में उन्होंने जब कंपनी की बागडोर संभाली थी तो इसका नेटवर्थ महज तीन करोड़ था, अभी यह 200 करोड़ पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि अपनी सेवाओं को गति देने व राजस्व बढ़ाने के लिए कंपनी ने नए-नए क्षेत्रों में प्रवेश किया है। हमने बड़े पैमाने पर सेवा क्षेत्र में प्रवेश किया है, जैसे ओ एंड एम, सिविल निर्माण, कंटेनर निर्माण, फाउंड्री, सामग्री प्रबंधन और सौर ऊर्जा आदि।
1913 में हुई थी कंपनी की स्थापना
बता दें कि ब्रेथवेट की स्थापना साल 1913 में कोलकाता में हुई थी और इसे 1976 में सरकारी संस्थान के रूप में राष्ट्रीयकृत किया गया था। इसकी उत्पाद श्रृंखला में रेलवे रोलिंग स्टाक का निर्माण, पुराने रोलिंग स्टाक की मरम्मत, फिटमेंट, सिविल जॉब सहित स्ट्रक्चरल स्टील ब्रिज, वैगन कंपोनेंट के निर्माण, रेलवे वर्कशाप के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस, क्रेन निर्माण और सेवाएं शामिल हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप बल्क कंटेनर निर्माण, रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास, सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना भी कंपनी की पिछले पांच वर्षों की उपलब्धि है।
पहले अपना घर, फिर बाहर देखेंगे: कुमार
एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा, हमें विदेशों से भी ऑर्डर मिले। हमने उसका निरीक्षण किया और फिर यह सोचा कि पहले हम अपने देश के काम को पूरा करेंगे। अभी देश में ही बहुत से काम करने हैं। यूक्रेन से भी हमें ऑर्डर आए थे, लेकिन हमने मना कर दिया। पहले देश का विकास, फिर बाहर का काम देखेंगे। अभी हमें अपने देश में ही बहुत काम करने बाकी हैं।