ब्रह्मोस एयरोस्पेस के डायरेक्टर जनरल के तौर पर डीआरडीओ वैज्ञानिक जयतीर्थ जोशी की नियुक्ति को लेकर विवाद में तेलंगाना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कैट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें नियुक्ति पर सवाल उठाए गए थे। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के महानिदेशक के तौर पर डीआरडीओ वैज्ञानिक जयतीर्थ जोशी की नियुक्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश में जोशी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर उनके खिलाफ फैसला सुनाया गया था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले से जोशी की नियुक्ति को बड़ी राहत मिली है।
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किसने दी है चुनौती?
डीआरडीओ वैज्ञानिक शिवसुब्रमण्यन नाम्बी नायडू ने जैतीर्थ जोशी की नियुक्ति को चुनौती दी थी। नायडू ने नियुक्ति प्रक्रिया और इस पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को लेकर कैट के सामने कई मुद्दे उठाए। वहीं इस मामले में, नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठता, तकनीकी विशेषज्ञता और पद के लिए उपयुक्तता जैसे मुद्दे उठाए गए। याचिकाकर्ता पक्ष ने वरिष्ठता और योग्यता पर जोर दिया। वहीं, दूसरे पक्ष ने नियुक्ति प्रक्रिया और उम्मीदवार की उपयुक्तता के आधार पर तर्क दिया।
कैट ने नियुक्ति पर सवाल क्यों उठाया?
वैज्ञानिक शिवसुब्रमण्यन नाम्बी नायडू की चुनौती के बाद यह मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की हैदराबाद बेंच के पास पहुंचा। कैट ने जोशी की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए इसे रद्द करने का आदेश दिया। ट्रिब्यूनल ने संबंधित अधिकारियों को चयन प्रक्रिया पर फिर से विचार करने का निर्देश भी दिया। इसके बाद, केंद्र सरकार और जयतीर्थ जोशी ने कैट के आदेश को तेलंगाना हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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हाई कोर्ट ने कैट का आदेश पलटा
मामले की सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया के कई पहलुओं पर विचार किया। अब हाईकोर्ट ने कैट के आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, ब्रह्मोस एयरोस्पेस के डायरेक्टर जनरल के तौर पर जयतीर्थ जोशी की नियुक्ति से जुड़ी कानूनी स्थिति अब उनके पक्ष में हो गई है।
क्या है ब्रह्मोस एयरोस्पेस?
ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत और रूस का एक जॉइंट वेंचर है। यह देश की डिफेंस क्षमताओं से जुड़े अहम प्रोग्राम में शामिल है। इसलिए, इस संगठन के डायरेक्टर जनरल की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद काफी अहम माना जा रहा था।