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फिल्म आर्टिकल 15 के विरोध में कोर्ट जाएंगे ब्राह्मण संगठन, घृणा फैलाने का आरोप

Fri, 14 Jun 2019 04:41 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिल्म आर्टिकल 15 का पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
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अनुभव सिन्हा की निर्देशित फिल्म आर्टिकल 15 आगामी 28 जून को रिलीज होने को तैयार है। लेकिन इसके पहले ही फिल्म पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ब्राह्मण संगठनों ने इस फिल्म के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है। संगठनों का आरोप है कि इस फिल्म के जरिये देश में ब्राह्मण और दलितों के बीच वैमनस्य बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अभिलाषा द्विवेदी ने इस फिल्म पर अपना विरोध जताते हुए अमर उजाला से कहा कि बदायूं की एक घटना में पिछड़े समाज की दो बेटियों से कुछ लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था और इसके बाद उनकी हत्या कर उन्हें पेड़ से लटका दिया था। 

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इस घटना के आरोपी भी एक अन्य पिछड़े समुदाय से थे, लेकिन आयुष्मान खुराना स्टारर इस फिल्म में घटना के आरोपियों को ब्राह्मण दिखा दिया गया है। आरोपी को एक हिन्दू मठ के संत का बिगड़ा दबंग लड़का दिखाया गया है। फिल्म में इस काण्ड की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों के बीच भी समाज में नफरत फैलाने वाले जातिवादी डायलाग बोलते हुए दिखाए गये हैं। 

उन्होंने कहा कि फिल्म में एक पक्ष के लोगों को भगवा झंडे के साथ तो दूसरे पक्ष को नीले झंडे के साथ दिखाया गया है। इसके आलावा फिल्म में बार-बार संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म का शीर्षक भी संविधान से लिया गया लगता है जो दूसरों की भावनाएं आहत करने वाला है। उनके मुताबिक फिल्म की आड़ में ब्राह्मणों और दलितों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश की जा रही है जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।  
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डॉ. अभिलाषा द्विवेदी ने कहा कि फिल्में हमारे समाज का सबसे सशक्त माध्यम हैं। इनसे करोड़ों युवा आकर्षित और प्रभावित होते हैं। ऐसे में इसके माध्यम से देश को आगे बढ़ाने की बात होनी चाहिए, न कि इसके जरिये जातिवादी घृणा को फैलाने की कोशिश करनी चाहिए जो कि अब समाज से तेजी से खत्म हो रहा है। 

कोर्ट में करेंगे अपील

डॉ. अभिलाषा द्विवेदी ने कहा कि अब तक इस फिल्म के खिलाफ देश के अनेक राज्यों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। जल्द ही इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की जायेगी और किसी को फिल्म के जरिये बांटने की अनुमति नहीं दी जायेगी। 

अनुभव सिन्हा ने कहा

अमर उजाला ने आर्टिकल 15 के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर अनुभव सिन्हा से बातकर फिल्म के विरोध पर उनका पक्ष जानने की कोशिश की। अनुभव सिन्हा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे फिल्म का विरोध करने वालों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ इस फिल्म को देखने की अपील करते हैं। अमर उजाला ने इस फिल्म पर सेंसर बोर्ड की प्रतिक्रिया भी जानने की कोशिश की। हालांकि, सेंसर बोर्ड से इस फिल्म पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। 

ऐड गुरु ने कहा

बॉलीवुड में ऐड गुरु के नाम से विख्यात प्रहलाद कक्कड़ ने कहा कि हमारे देश में सेंसर बोर्ड नाम की मजबूत संस्था है। इसमें बैठे लोग इतने समझदार हैं कि उन्हें किस फिल्म को अनुमति देनी है और किस फिल्म को अनुमति नहीं देनी है, इसकी अच्छी समझ है। ऐसे में हर फिल्म के रिलीज होने के पहले किसी तरह का विरोध बिलकुल नाजायज है। 

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार पद्मावत फिल्म पर भी विरोध किया गया था, लेकिन जब फिल्म पब्लिक के बीच आई तो पब्लिक को इसमें कहीं कुछ बुरा नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि इस देश में सर्वोच्च जनता है और उसकी समझ पर सवाल खड़े करना समझदारी नहीं है। अगर फिल्म पर उसकी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं आएगी तो फिल्म खुद ही पिट जायेगी। उन्होंने कहा कि मैं अनुभव सिन्हा और सेंसर बोर्ड के प्रसून जोशी को बेहतर ढंग से जानता हूं। वे समाज के खिलाफ कोई गलत काम नहीं करेंगे और सबको इस बात पर भरोसा भी होना चाहिए। 

कक्कड़ के मुताबिक अगर इस फिल्म पर याचिका दाखिल की जाती है और कोर्ट इस पर संज्ञान लेती है तो अच्छी बात है। देश के हर नागरिक को अपना विरोध दर्ज करने के लिए और न्याय पाने के लिए कोर्ट में जाने का अधिकार है, लेकिन अगर कोर्ट इजाजत दे दता है तो उस पर किसी तरह का सवाल नहीं खड़ा किया जाना चाहिए। 

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