जातिगत समीकरणों को साधते हुए उत्तर प्रदेश से मोदी कैबिनेट में ब्राह्मण दलित और ओबीसी चेहरों को जगह मिलनी तय मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी से 8 ब्राह्मण सांसद उत्तर प्रदेश से चुने गए हैं। इसमें पीलीभीत से जितिन प्रसाद, कुशीनगर से विजय कुमार दुबे, कानपुर से रमेश अवस्थी, झांसी से अनुराग शर्मा, गोरखपुर से रवींद्र किशन शुक्ला उर्फ रवि किशन, नोएडा से महेश शर्मा, देवरिया से शशांक मणि त्रिपाठी और अलीगढ़ से सतीश कुमार गौतम शामिल हैं। चर्चा मोदी कैबिनेट में सबसे ज्यादा पीलीभीत के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद की हो रही है। इसके अलावा दूसरा नाम नोएडा के सांसद महेश शर्मा का है। जबकि तीसरा नाम उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा का चल रहा है।
भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश से एक बार फिर आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा हाथरस से लोकसभा का चुनाव जीते अनूप वाल्मीकि को भी मोदी कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में न सिर्फ जातिगत समीकरणों के आधार पर मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। बल्कि बड़े राज्य होने के चलते इलाकाई बैलेंस भी बनाया जाएगा। इसमें पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड और पश्चिम से लेकर अवध क्षेत्र शामिल होंगे। इन क्षेत्रों से ही मोदी के मंत्रिमंडल में सांसदों को जगह दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश से पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों से भी कुछ सांसदों के मोदी कैबिनेट में शामिल होने की चर्चाएं सबसे ज्यादा हो रही हैं। इसमें अपना दल से अनुप्रिया पटेल, भदोही से विनोद कुमार बिंद समेत पंकज चौधरी का नाम चर्चा में है। जबकि सहयोगी दलों से भारतीय जनता पार्टी इस बार जयंत चौधरी को मोदी कैबिनेट में जगह दी जाएगी। इन सब नामों के साथ में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह का नाम मोदी कैबिनेट में तय माना जा रहा है।
हालांकि सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की भी हो रहीं हैं कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ कद्दावर नेता जो चुनाव हार गए हैं, उनको भी मोदी कैबिनेट में जगह की जा सकती है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बात को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि इस वक्त जो सियासी हालात हैं, उसमें भारतीय जनता पार्टी ऐसे किसी भी नेता पर खास कर उत्तर प्रदेश में दांव नहीं लगाएगी, जिसे जनता ने रिजेक्ट कर दिया हो। ऐसे हालात में तय माना जा रहा है कि मोदी कैबिनेट उत्तर प्रदेश से मंत्रियों की संख्या कम हो सकती है।