मामले की जांच कर रही सीबीआई ने आरोप पत्र में कहा कि 8 सितंबर 2017 को परीक्षा स्थगित कराने के लिए पैरेंट्स टीचर मीटिंग रद्द कराने के लिए कक्षा 11 में पढ़ने वाले किशोर छात्र ने कक्षा दो के छात्र की हत्या कर दी थी। बच्चे की गला कटा हुआ शव स्कूल के टॉयलेट में मिला था।
सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में सात साल के छात्र की हत्या के मामले में नए सिरे से यह जांचने का आदेश दिया कि हत्यारे पर बालिग के तौर पर मुकदमा चलाया जाए या नहीं। दरअसल वारदात के वक्त हत्यारा उसी स्कूल में कक्षा 11 का छात्र था और किशोर था।
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जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने बुधवार को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के 2018 के फैसले के खिलाफ सीबीआई और मृतक छात्र के पिता बरुण कुमार ठाकुर की अपील भी खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने स्कूल के ग्यारहवीं कक्षा के छात्र के खिलाफ दूसरी कक्षा के छात्र की हत्या में एक वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने का फैसला रद्द कर दिया था। पीठ ने कहा, हम हाईकोर्ट के इस बात से सहमत हैं कि कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने की गलतियों को सुधारते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत ने बालिग की तरह मुकदमा चलाने का फैसला लेने में जो प्रक्रिया अपनाई है वह कानून की नजर में नहीं टिकती। हाईकोर्ट ने इस मामले को नए सिरे से विचार करने और बुद्धि, परिपक्वता, शारीरिक फिटनेस के साथ साथ बच्चे में अपराध के परिणामों को जानने की स्थिति का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया था।
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मामले की जांच कर रही सीबीआई ने आरोप पत्र में कहा कि 8 सितंबर 2017 को परीक्षा स्थगित कराने के लिए पैरेंट्स टीचर मीटिंग रद्द कराने के लिए कक्षा 11 में पढ़ने वाले किशोर छात्र ने कक्षा दो के छात्र की हत्या कर दी थी। बच्चे की गला कटा हुआ शव स्कूल के टॉयलेट में मिला था।