दिल्ली एशियाई खेलों का गोल्ड मेडल जीते बॉक्सर कौर सिंह को 35 साल हो गए हैं। इस गोल्ड के बदले तत्कालीन पंजाब सरकार ने उन्हें एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा कर डाली, पर यह राशि उन्हें कभी नहीं दी गई।
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इस इनाम की याद कौर सिंह को कई बार आई, लेकिन इसे देने की गुहार वह अब लगा रहे हैं, अपना इलाज कराने के लिए। दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मोहाली के एक अस्पताल के बिस्तर पर पड़े इस पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी बॉक्सर के मुंह से यही निकलता है, काश अब तो सरकार उन्हें उनके गोल्ड का इनाम दे डाले जिससे वह अपना इलाज करा सकें।
सच्चाई यह है कि कभी महान बॉक्सर मुहम्मद अली से लड़ने वाला यह बॉक्सर आढ़तियों से ब्याज पर पैसा लेकर अपना इलाज करा रहा है। पिछले कई दिनों से वह मोहाली के एक निजी अस्पताल में दाखिल हैं।सुपर हैवीवेट वर्ग में कौर सिंह ने 1982 के दिल्ली के एशियाई खेलों का ही गोल्ड नहीं बल्कि दो बार एशियन चैंपियनशिप और प्रतिष्ठित किंग्स कप का गोल्ड मेडल जीता है।
पंजाब पुलिस से सेवानिवृत होने के बाद कौर सिंह के हिस्से में पेंशन आती है। वह अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि दिल की बीमारी का इलाज ढंग से करा सकें। दो साल पहले जब उनके दिल का आपरेशन हुआ तो उन्होंने आढ़तियों से दो लाख रुपया लिया था।
वह उसका ब्याज आज तक दे रहे हैं। बीते माह फिर उनके पूरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया। उन्हें संगरूर से मोहाली लाया गया। पिछले 22 दिनों से वह अस्पताल में हैं। हालांकि कुछ सरकारी मदद मिलती है, लेकिन पूरी नहीं पड़ रही है। यही कारण है कि उन्होंने फिर ब्याज पर पैसा लिया है।
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बॉक्सिंग की चोटों की मेहरबानी है बीमारी
कौर सिंह भावुक होकर कहते हैं कि डॉक्टर का कहना है कि उनके बॉक्सिंग के कैरियर के दौरान उन्हें जो चोटें लगी हैं। उसी के चलते उनके दिल की नसें कमजोर हो गई हैं। दुखी होकर वह कहते हैं कि जवानी के दिनों में चोटों का पता नहीं लगा लेकिन बुढ़ापे में इनका खुलासा हो रहा है।
मुहम्मद अली से लड़ लिया, कई नामी बॉक्सरों को हरा दिया, लेकिन इस बीमारी से नहीं लड़ पा रहा हूं। सरकार अगर उन्हें उनका इनाम का एक लाख भी दे दे तो बड़ा सहारा होगा।