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भारत-चीन सैन्य वार्ता: संचार और संवाद को जारी रखने पर दोनों पक्षों ने जताई सहमति

Sun, 21 Feb 2021 11:06 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत और चीन की सेना (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि भारत-चीन कोर कमांडर लेवल की 10वीं दौर की बैठक चीन की तरफ मोल्दो/चुशुल सीमा बिंदु क्षेत्र में शनिवार को हुई। रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति के सैनिकों की वापसी को पूरी तरह से सकारात्मक रूप से स्वीकार किया और कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कदम था जिसने पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ अन्य शेष मुद्दों के समाधान के लिए एक अच्छा आधार प्रदान किया।’

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मंत्रालय ने आगे कहा, ‘दोनों पक्ष अपने राज्य के नेताओं की महत्वपूर्ण सर्वसम्मति का पालन करने के लिए सहमत हुए। साथ ही दोनों पक्ष अपने संचार और संवाद को जारी रखने के लिए, जमीन पर स्थिति को स्थिर व नियंत्रित करने के लिए और स्थिर व क्रमबद्ध तरीके से शेष मुद्दों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए जोर देने के लिए सहमत हुए।
 

The 10th round of India-China Corps Commander Level meeting was held on the Chinese side of the Moldo/Chushul border meeting point yesterday: Defence Ministry

— ANI (@ANI) February 21, 2021

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पैंगोंग झील क्षेत्र से वापसी अन्य मुद्दों के हल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
उधर, भारत और चीन ने 10वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद रविवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि पैंगोंग झील क्षेत्र से सैन्य वापसी पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष अपने नेताओं के बीच बनी सहमति, अपना संवाद और संपर्क जारी रखने, जमीन पर स्थिति को स्थिर और नियंत्रित करने तथा शेष मुद्दों का संतुलित और व्यवस्थित तरीके से समाधान करने पर भी सहमत हुए।


यह बयान दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की 16 घंटे तक चली दसवें दौर की वार्ता के बाद आया है, जो एलएसी पर चीन की तरफ मोल्डो बिंदु क्षेत्र में शनिवार सुबह 10 बजे शुरू हुई थी और रात दो बजे तक चली। बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील क्षेत्र से अग्रिम पंक्ति के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया सुगमता से पूरी होने के बारे में सकारात्मक रूप से अवगत कराया और उल्लेख किया कि यह पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’

इसमें कहा गया कि उन्होंने (दोनों पक्षों) पश्चिमी सेक्टर में एलएसी से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचारों का व्यापक आदान-प्रदान किया।

दोनों देशों द्वारा पैंगोंग झील क्षेत्र के उत्तरी और दक्षिणी छोर क्षेत्रों से अपने-अपने सैनिकों और आयुधों को हटाए जाने के दो दिन बाद सैन्य स्तर की दसवें दौर की वार्ता हुई।

ऐसा माना जाता है कि वार्ता में भारत ने तनाव कम करने के लिए हॉट स्प्रिंग्स, गोग्रा और डेपसांग क्षेत्रों से सैनिकों की जल्द वापसी पर जोर दिया।

सूत्रों ने शनिवार शाम कहा था कि क्षेत्र में तनाव कम करना वार्ता की शीर्ष प्राथमिकता है। भारत हमेशा जोर देकर कहता रहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए तनातनी के सभी बिंदुओं से सैन्य वापसी आवश्यक है।

दोनों देशों की सेनाओं के बीच पैंगोंग झील क्षेत्र में पिछले साल पांच मई को हिंसक झड़प के बाद सैन्य गतिरोध उत्पन्न हो गया था। दोनों देशों ने तनाव के बीच हजारों सैनिकों और भारी अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी। दोनों पक्षों के बीच लगातार कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ता भी होती रही।

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