रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि भारत-चीन कोर कमांडर लेवल की 10वीं दौर की बैठक चीन की तरफ मोल्दो/चुशुल सीमा बिंदु क्षेत्र में शनिवार को हुई। रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति के सैनिकों की वापसी को पूरी तरह से सकारात्मक रूप से स्वीकार किया और कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कदम था जिसने पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ अन्य शेष मुद्दों के समाधान के लिए एक अच्छा आधार प्रदान किया।’
The 10th round of India-China Corps Commander Level meeting was held on the Chinese side of the Moldo/Chushul border meeting point yesterday: Defence Ministry
— ANI (@ANI) February 21, 2021
यह बयान दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की 16 घंटे तक चली दसवें दौर की वार्ता के बाद आया है, जो एलएसी पर चीन की तरफ मोल्डो बिंदु क्षेत्र में शनिवार सुबह 10 बजे शुरू हुई थी और रात दो बजे तक चली। बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील क्षेत्र से अग्रिम पंक्ति के सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया सुगमता से पूरी होने के बारे में सकारात्मक रूप से अवगत कराया और उल्लेख किया कि यह पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’
इसमें कहा गया कि उन्होंने (दोनों पक्षों) पश्चिमी सेक्टर में एलएसी से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचारों का व्यापक आदान-प्रदान किया।
दोनों देशों द्वारा पैंगोंग झील क्षेत्र के उत्तरी और दक्षिणी छोर क्षेत्रों से अपने-अपने सैनिकों और आयुधों को हटाए जाने के दो दिन बाद सैन्य स्तर की दसवें दौर की वार्ता हुई।
ऐसा माना जाता है कि वार्ता में भारत ने तनाव कम करने के लिए हॉट स्प्रिंग्स, गोग्रा और डेपसांग क्षेत्रों से सैनिकों की जल्द वापसी पर जोर दिया।
सूत्रों ने शनिवार शाम कहा था कि क्षेत्र में तनाव कम करना वार्ता की शीर्ष प्राथमिकता है। भारत हमेशा जोर देकर कहता रहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए तनातनी के सभी बिंदुओं से सैन्य वापसी आवश्यक है।
दोनों देशों की सेनाओं के बीच पैंगोंग झील क्षेत्र में पिछले साल पांच मई को हिंसक झड़प के बाद सैन्य गतिरोध उत्पन्न हो गया था। दोनों देशों ने तनाव के बीच हजारों सैनिकों और भारी अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी। दोनों पक्षों के बीच लगातार कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ता भी होती रही।