Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रशांत वाजिरानी को मिली जमानत में दखल देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड देखने के बाद जमानत रद्द करने का आधार नहीं बनता, हालांकि राज्य सरकार डॉक्टर की गतिविधियों पर नजर रख सकती है। मामला क्या है, पढ़ें रिपोर्ट-
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात के एक कार्डियोलॉजिस्ट को दी गई जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। इस डॉक्टर को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना (पीएमजेएवाई) के दो लाभार्थियों (मरीजों) की कथित तौर पर बिना वह एंजियोप्लास्टी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों मरीजों की मौत हो गई थी।
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जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच ने गुजरात सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। सरकार ने याचिका में हाईकोर्ट की ओर से आठ दिसंबर को डॉक्टर प्रशांत वाजिरानी को दी गई नियमित जमानत को चुनौती दी थी।
शीर्ष कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों से क्या कहा?
गुजरात सरकार की ओर से वकील स्वाति घिल्डियाल पेश हुईं।
बेंच ने वकील घिल्डियाल से कहा, वह एक डॉक्टर हैं, कार्डियोलॉजिस्ट हैं, उन्हें सेवा करने दीजिए। आप उन पर नजर रख सकते हैं। अगर वह कुछ गलत करते हैं, तो आप कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
गुजरात सरकार ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। डॉक्टर की ओर से की गई अनावश्यक सर्जरी के कारण दो लोगों की जान चली गई।
इस पर जस्टिस माहेश्वरी ने कहा, हमने पूरा रिकॉर्ड देखा है। हम इसमें दखल नहीं देंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार से भी पूछा, वह यह सब क्यों कर रहे थे? आप कार्डियोलॉजिस्ट हैं, ऐसी चीजों में शामिल न हों।
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पूरा मामला क्या हुआ था?
आठ दिसंबर को गुजरात हाईकोर्ट ने डॉ. वाजिरानी को जमानत दी थी। उन पर अहमदाबाद के ख्याति मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में मरीजों की एंजियोप्लास्टी करने का आरोप था। 14 नवंबर 2024 को पुलिस ने पीएमजेएवाई के दो लाभार्थियों की मौत के मामले में तीन प्राथमिकियां दर्ज की थीं। ये मौतें कथित तौर पर गलत और अनावश्यक एंजियोप्लास्टी के कारण हुई थीं। इसके बाद पुलिस ने डॉ. वाजिरानी को गिरफ्तार किया।
डॉक्टर के खिलाफ दर्ज हुए थे तीन मामले
ये मामले शहर की वस्त्रापुर पुलिस ने दर्ज किए थे और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से दो मामले मृतकों के परिजनों की शिकायत पर दर्ज किए गए थे, जबकि तीसरा मामला मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी की ओर से राज्य सरकार की ओर से दर्ज कराया गया था।