मिजोरम असम के साथ 164.6 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। दो पूर्वोत्तर राज्यों के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद मुख्य रूप से 1875 और 1933 में दो औपनिवेशिक सीमांकन से उत्पन्न हुआ था।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान के लिए जल्द मिलने का फैसला किया है। शुक्रवार को दोनों मुख्यमंत्रियों ने फोन पर बातचीत करने के बाद 19 सितंबर को दिल्ली में मिलने का कार्यक्रम बनाया है, ताकि ताकि दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
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सूत्रों के मुताबिक यह बैठक दिल्ली में होगी। हालांकि अभी जगह तय नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि मिजोरम असम के साथ 164.6 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। दो पूर्वोत्तर राज्यों के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद मुख्य रूप से 1875 और 1933 में दो औपनिवेशिक सीमांकन से उत्पन्न हुआ था।
मिजोरम ने 1875 में अधिसूचित बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (बीईआरएफ) के तहत स्थापित सीमांकन को मान्यता दी, जिसमें व्यापक क्षेत्र शामिल हैं, जो वर्तमान में असम के अंतर्गत आता है। हालाँकि, असम प्रशासन ने 1933 की अधिसूचना के परिसीमन को इंगित किया जो संवैधानिक सीमा के भीतर आता है।
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उल्लेखनीय है कि 2021 में अंतरराज्यीय सीमा विवाद के चलते करीब छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी जबकि करीब 60 लोग घायल हो गए थे। अगस्त 2021 में दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने मिजोरम की राजधानी आइजोल में बातचीत की थी। दुखद घटना के बाद, दोनों राज्य सरकारों ने शांतिपूर्वक बनाए रखने और अंतरराज्यीय सीमा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत करने पर सहमति व्यक्त की थी।