महाराष्ट्र के मंत्री शंभुराज देसाई ने बताया कि हमारे दो मंत्रियों की बेलगावी यात्रा के बारे में हमने कर्नाटक सरकार को अधिकृत तौर पर सूचित किया था। देसाई ने कहा कि हमने यात्रा स्थगित की है, रद्द नहीं। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल व देसाई आज बेलगावी जाने वाले थे।
महाराष्ट्र व कर्नाटक के बीच सीमा विवाद गहराता जा रहा है। इसके चलते महाराष्ट्र के दो मंत्रियों की कर्नाटक के बेलगावी यात्रा को स्थगित करना पड़ा है। ये मंत्री वहां जाकर ग्रामीणों से चर्चा करने वाले थे। कर्नाटक सरकार ने कहा कि उनकी यात्रा से वहां कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल व देसाई आज बेलगावी जाने वाले थे।
महाराष्ट्र के मंत्री शंभुराज देसाई ने बताया कि हमारे दो मंत्रियों की बेलागावी यात्रा के बारे में हमने कर्नाटक सरकार को अधिकृत तौर पर सूचित किया था। देसाई ने कहा कि हमने यात्रा स्थगित की है, रद्द नहीं की।
देसाई ने बताया कि हम अपने दौरे की अगली तारीख जल्द तय करेंगे। हम बेलगावी में मराठी भाषी लोगों से बात करेंगे। उनके साथ हम उस पैकेज पर चर्चा करेंगे, जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री उन 850 गांवों के मराठी भाषी लोगों को देना चाहते हैं।
शिवसेना के उद्धव गुट के नेताओं ने कर्नाटक की बसों पर लिखा जय महाराष्ट्र
इस बीच, सामने आया है कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के क्रम में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के कार्यकर्ताओं ने पुणे में कर्नाटक राज्य परिवहन की तीन बसों पर 'जय महाराष्ट्र' लिखा। वहीं, पुणे की डीसीपी जोन 2 समर्थना पाटिल ने बताया कि कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा मुद्दे को लेकर कर्नाटक की बसों पर पेंट छिड़कने के आरोप में सात लोगों को हिरासत में लिया गया है। कोई तोड़फोड़ की सूचना नहीं मिली थी। मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। हम अभी तक हिरासत में लिए गए लोगों के संगठन या पार्टी की पहचान नहीं कर पाए हैं।
बता दें, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। महाराष्ट्र सरकार ने मंत्री चंद्रकांत पाटिल और शंभुराज देसाई को सीमा विवाद के समन्वय के लिए नियुक्त किया है। ये दोनों मंत्री आज कर्नाटक के बेलगावी जाकर महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमईएस) के कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर सीमा विवाद पर बातचीत करने वाले थे।
देवेंद्र फडणवीस ने दी प्रतिक्रिया
दोनों राज्यों में सीमा विवाद मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार को मामले में ध्यान देना चाहिए। हिंसा के जवाब में हिंसा ठीक नहीं है। कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि मैंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री से बात की है, उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हमारा संविधान सभी को किसी भी राज्य में रहने और काम करने का अधिकार देता है। मैं इस मुद्दे को गृह मंत्री अमित शाह के पास ले जाऊंगा। मैं महाराष्ट्र के लोगों से प्रतिक्रिया नहीं करने का अनुरोध करता हूं।
संजय राउत ने साधा निशाना
शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मंत्रियों चंद्रकांत पाटिल और शंभुराज देसाई को कर्नाटक के साथ बढ़ते सीमा विवाद के बीच बेलागवी का दौरा नहीं करने पर कायर कहा। इसके साथ ही उन्होंने एकनाथ शिंदे और भाजपा सरकार को भी कमजोर और असहाय बताते हुए उस पर निशाना साधा।
उद्धव ठाकरे गुट के प्रमुख नेता राउत ने कहा कि दशकों पहले कर्नाटक के साथ सीमा विवाद छिड़ने के बाद से शिवसेना लगातार करारा जवाब दे रही है। इस दौरान उन्होंने आश्चर्य जताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के बीच महाराष्ट्र सरकार क्या कर रही है। इस दैौरान उन्होंने शिंदे सरकार के मंत्रियों पाटिल और देसाई का जिक्र करते हुए कहा कि वे कायर हैं। उन्हें (बेलगावी में) नहीं आने का पत्र मिला और वे डर गए। उन्हें कुछ हिम्मत दिखानी चाहिए थी और बेलगावी जाना चाहिए था। आपको कौन रोकता? आपके पास पुलिस सुरक्षा है। आप पर कोई पत्थर नहीं फेंका जाता क्योंकि आप 'सेटिंग' करने के बाद वहां जाते।
फडणवीस भी नहीं थे यात्रा के पक्ष में
मंत्रियों की बेलगावी यात्रा को लेकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी सहमत नहीं थे। उन्होंने गत दिवस मुंबई में कहा था कि जिन दो मंत्रियों ने विवादित क्षेत्रों का दौरा करने की घोषणा की थी, उन्हें बाबा साहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर स्थानीय लोगों ने आमंत्रित किया था। हमारा मानना है कि कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए विवादित क्षेत्रों में ऐसी यात्रा से परहेज करना चाहिए।हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि भारत एक स्वतंत्र देश है इसलिए किसी को भी किसी स्थान पर जाने से मना नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, विवादित क्षेत्र से जुड़ा मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और हम चाहते हैं कि इस मामले में आगे कोई अड़चन न आए।
महाराष्ट्र की स्थापना के बाद से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
बता दें, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बेलगावी व कारवार के कुछ गांवों को लेकर सीमा विवाद है। कर्नाटक में आने वाले इन गांवों की आबादी मराठी भाषी है। महाराष्ट्र में लंबे समय से इन गांवों को राज्य में शामिल किए जाने की मांग हो रही है। 1960 में महाराष्ट्र की स्थापना के बाद से यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।