रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की एक इकाई ने एक कॉम्पैक्ट सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) और एक प्रमुख संचार प्रणाली के क्षेत्रीय परीक्षण सफलतापूर्वक किये हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
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डीईएएल ने किया जोशीमठ में परिक्षण
इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी और मिशन महत्वपूर्ण संचार समाधान विकसित करने में संगठन की प्रतिबद्धता मजबूत हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स अनुप्रयोग प्रयोगशाला (डीईएएल), देहरादून ने यह परीक्षण उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में किया है।
डीआरडीओ ने गृह मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के समन्वय से अंजाम दिया
डीआरडीओ ने मंगलवार को बताया कि इन परीक्षणों को गृह मंत्रालय, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और अन्य एजेंसियों के साथ निकट समन्वय में अंजाम दिया गया। आईटीबीपी, एसएसबी, बीएसएफ, असम राइफल्स, आईबी, एनएसजी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ जैसी अर्धसैनिक इकाइयों के अधिकारी भी इसमें शामिल रहे।
परीक्षण का उद्देश्य
परीक्षणों का उद्देश्य विभिन्न भू-भागों और ऑपरेशनल परिस्थितियों में इन प्रणालियों की वास्तविक प्रदर्शन क्षमता का परीक्षण करना था। इसमें क्वालिफिकेशन रिक्वायरमेंट (क्यूआर) और टेक्निकल डॉक्यूमेंट्स (टीडीएस) के अनुरूप प्रमुख मापदंडों की पुष्टि भी शामिल थी।
क्या है एसडीआर और सीटीसीएस प्रणाली?
डीआरडीओ की वेबसाइट के अनुसार, एसडीआर एक सुरक्षित स्वदेशी संचार प्रणाली है जो डिजिटल वॉइस/डेटा कम्युनिकेशन में सक्षम है। यह नौसेना और सामरिक उपयोगों के लिए कई बैंड में कार्य कर सकती है। वहीं, सीटीसीएस प्रणाली डीईएएल द्वारा विकसित एक टेरेस्ट्रियल बैकहॉल संचार प्रणाली है, जो दूरस्थ स्थानों पर उच्च डेटा दर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है। यह उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहां नागरिक संचार नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता।
डीआरडीओ ने कहा कि यह उपलब्धि राष्ट्रीय की सुरक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर और उन्नत संचार प्रणालियों के विकास के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।