भारतीय रेलवे सिर्फ अपने बुनियादी ढांचे में ही सुधार नहीं कर रहा है बल्कि यह अपनी सुविधाओं का दुरुपयोग और छेड़छाड़ करने वालों के लिए भी काम कर रहा है। कितनी बार होता है कि आप टिकट बुक करते हैं लेकिन आपको उसकी पुष्टि नहीं होती है। लेकिन ऐसा अकसर होता है। इसके पीछे धीमी वेवसाइट के अलावा घोटाला भी एक कारण है। बता दें कि 2 मई को रेलवे ने एक व्यक्ति को मुंबई से गिरफ्तार किया था, जो कथित रूप से एक नकली सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर रहा था। उसने ये धोखाधड़ी करके एक महीने में 35 लाख रुपए कमाए थे।
वहीं एक अन्य मामले में सीबीआई अधिकारी और उसकी एक साथी ने फर्जी सॉफ्टवेयर के माध्यम से रेलवे में तत्काल टिकट आरक्षण प्रणाली के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की। यह मामला पिछले साल दिसंबर में सामने आया था। लेकिन अब भारतीय रेलवे ऐसी सभी घटनाओं को रोकने के लिए अलर्ट हो गया है। ऐसा करने वालों के खिलाफ रेलवे की पैनी नजर है। यही नहीं ई-टिकट धोखाधड़ी करने वालो को दंडित करने के प्रावधान 1989 में संशोधन करने का भी विचार किया जा रहा है। वर्तमान में अधिनियम ई-टिकट धोखाधड़ी की कप्लना नहीं करता है। लेकिन उन्हें दंडित करने का प्रावधान है जो इस तरह से टिकट बेचते हैं।
तत्काल टिकट बुकिंग पर रेलवे अब सख्त हो गया है। अब ऐसी धोखाधड़ी करने वालों पर रेलवे 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाएगा। अभी तक धोखाधड़ी करने वालों के लिए सिर्फ दस हजार रुपए जुर्माने का ही प्रावधान है।