पब्लिशिंग हाउस 'पेंगुइन इंडिया' ने बुधवार को महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे की मराठी जीवनी 'तुकाराम' के अंग्रेजी अनुवाद की घोषणा की। मूल रूप से पत्रकार शफी पठान की ओर से मराठी में लिखी गई इस किताब का अंग्रेजी अनुवाद विक्रांत पांडे करेंगे।
क्यों चर्चा में आए मुंढे ?
मुंढे पूरे महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर की गई सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में रहे हैं। मई 2026 में पद संभालने के बाद से, उनकी टीम ने 12,000 से ज्यादा निरीक्षण किए हैं, हजारों नोटिस जारी किए हैं और साफ-सफाई व सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन के कारण सैकड़ों प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए हैं।
किताब में मुंढे के सफर के बारे में बताया जाएगा
यह किताब मुंढे के सफर को दिखाती है। ग्रामीण महाराष्ट्र में आर्थिक रूप से मुश्किल बचपन से लेकर यूपीएससी परीक्षा में उनकी कामयाबी तक। इसमें उन अनुभवों के बारे में बताया गया है जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया और सिविल सर्विस में उनके शुरुआती दिनों के बारे में भी, जब पारदर्शी और नियमों पर आधारित प्रशासन पर उनके जोर की वजह से उन्हें विरोध और विवाद का सामना करना पड़ा।
पत्रकार शफी पठान ने क्या कहा?
पठान ने एक बयान में कहा, 'मैंने उनके मुश्किल बचपन से लेकर आईएएस अफसर बनने तक के सफर, उनके अहम फैसलों और जनसेवा के प्रति उनके मजबूत संकल्प को निष्पक्ष नजरिए से देखा है। मराठी संस्करण को पाठकों ने बहुत पसंद किया है। इसने मराठी साहित्य में एक मील का पत्थर स्थापित किया है। मुझे पूरा भरोसा है कि इस किताब के अंग्रेजी संस्करण को भी पाठकों से उतना ही प्यार और सराहना मिलेगी।'
एडिटर गुरवीन चड्ढा ने क्या कहा?
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के एबरी प्रेस और पेंगुइन वीर की एग्जीक्यूटिव एडिटर गुरवीन चड्ढा ने कहा, 'उनकी कहानी को जो चीज खास बनाती है। वह है व्यक्तिगत विश्वास और प्रशासन की हकीकत के बीच का तनाव। शफी पठान ने मुंढे की जिंदगी के कई पहलुओं को एक साथ लाकर एक ऐसे सिविल सर्वेंट की प्रेरणादायक और सोचने पर मजबूर करने वाली तस्वीर पेश की है, जिसने हमेशा अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना चुना है। हमें खुशी है कि हम इस बेहतरीन मराठी जीवनी को अंग्रेजी पढ़ने वाले बड़े पाठकों तक पहुंचा रहे हैं।'
पांडे के अनुसार, 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अफसर की यह कहानी न केवल उन लोगों को प्रेरित करेगी, जो आईएएस अफसर के तौर पर करियर बनाना चाहते हैं, बल्कि हर उस व्यक्ति को भी प्रेरित करेगी जो मानता है कि सही काम करना मायने रखता है, भले ही इसके लिए व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़े'।
उन्होंने आगे कहा, 'यह एक ऐसा उदाहरण है जिसका पालन भारत का नागरिक कर सकता है। मेरी इच्छा है कि हमारे पास ऐसे सैकड़ों लोग हों जो मिलकर भारत को बदल सकें। वे हमारे हीरो हैं और उन्हें नागरिकों का पूरा समर्थन प्राप्त है। हालांकि, मैं शफी के मूल काम का सिर्फ अनुवाद कर रहा हूं। इससे यह कहानी पूरे भारत और विदेशों तक पहुंच सकेगी।' किताब की रिलीज की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।