महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह
अभिनेता संजय दत्त को मिली हर पैरोल या फरलो के औचित्य को साबित कर सकती है। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सवाल पूछा कि क्या यही नियम सभी कैदियों पर लागू होते हैं। कोर्ट ने सरकार से एक आम कैदी दी जानी पैरोल और फरलो की विस्तृत जानकारी हलफनामे के तौर दाखिल करने का निर्देश दिया।
संजय दत्त को 1993 के
मुंबई बम धमाकों के मामले में पांच साल की सजा हुई थी लेकिन अच्छे चालचलन को देखते हुए 8 महीने और 16 दिन पहले ही 25 फरवरी 2016 में ही उनकी रिहाई हो गई। महाराष्ट्र सरकार के एडवोकेट जनरल आशुतोष ने कहा कि संजय दत्त कानून का उल्लंघन कर एक भी मिनट या सेकेंड के लिए जेल से बाहर नहीं गए। हम हर कैदी को दी जाने वाली पैरोल के लिए सख्त और मानक प्रक्रिया का पालन करते हैं।
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आरटीआई और पीआईएल में हम कोई चांस नहीं लेते हैं। उन्होंने कहा कि संजय को बेटी की बीमारी और पत्नी की सर्जरी के लिए पैरोल दी गई। सजा के दौरान अभिनेता पांच महीने से ज्यादा समय तक पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर रहे थे। इसका अन्य कैदियों के परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था।