यमन नागरिक के खिलाफ नशा तस्करी के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने मुंबई की एक निचली अदालत को निर्देश दिया है कि वह यमन के एक नागरिक के खिलाफ चल रहे दो नशा तस्करी के मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करे। अदालत ने कहा कि जब तक मामला खत्म नहीं होता, आरोपी को भारत में ही रखना पड़ता है, जिससे सरकार पर बेवजह खर्च बढ़ रहा है।
हाईकोर्ट ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत दो मामले लंबित हैं। जब तक इन मामलों का फैसला नहीं हो जाता, तब तक उसे उसके देश यमन वापस नहीं भेजा जा सकता। ऐसे में सरकार को उसकी रहने, खाने और अन्य जरूरतों का खर्च उठाना पड़ रहा है।
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तीन महीनों के भीतर करना होगा मामले का निपटारा
मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एएस गडकरी और आरआर भोंसले की पीठ ने निचली अदालत को आदेश दिया कि वह दोनों मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर करे। बता दें कि आरोपी गालाल नाजी मोहम्मद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उसे वीजा दिया जाए। उसने कहा कि वह सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ भारत आया था, लेकिन पिछले साल नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उसे दो नशा मामलों में गिरफ्तार कर लिया।
याचिका में यह भी बताया गया कि उसका वीजा खत्म हो चुका है, लेकिन केस चलने की वजह से न तो वीजा बढ़ाया जा रहा है और न ही उसे यमन भेजा जा सकता है। केंद्र सरकार की ओर से वकील अरुणा पई ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय की तय प्रक्रिया के अनुसार आरोपी को वीजा बढ़ाने के लिए आवेदन करना होगा और आवेदन मिलने के तीन हफ्ते के भीतर इस पर फैसला कर लिया जाएगा।
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हफ्ते के अंदर वीजा बढ़ाने का आवेदन
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस बात को स्वीकार करते हुए आरोपी को एक हफ्ते के अंदर वीजा बढ़ाने का आवेदन देने को कहा। साथ ही अभियोजन एजेंसी को भी निर्देश दिया गया कि वह ट्रायल कोर्ट के साथ पूरा सहयोग करे ताकि मामलों का निपटारा जल्दी हो सके।
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