बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रेस का अस्तित्व किसी कारण से है और उस उद्देश्य की रक्षा की जानी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक पक्ष की ओर से सीलबंद लिफाफे में सौंपी सामग्री को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
दरअसल, जस्टिस गौतम पटेल की पीठ ने बीते हफ्ते नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एक एजेंट द्वारा की गई वित्तीय गड़बड़ी के मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामले से जुड़े एक पक्ष ने कोर्ट को कुछ सामग्री सीलबंद लिफाफे में सौंपते हुए कहा, ऐसा न करने पर जानकारी मीडिया के पास पहुंचने का डर है। इसे खारिज करते हुए जस्टिस पटेल ने कहा, कम से कम मेरी अदालत में सीलबंद लिफाफे में कुछ होने का सवाल ही नहीं उठता। जो कुछ मैं देख सकता हूं, वह इस मामले से जुड़े सभी पक्ष देख सकते हैं। खुला और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित करने का मैं यही एक तरीका जानता हूं।
न प्रेस की आजादी कम कर सकता हूं, न करूंगा
जस्टिस पटेल ने संबंधित पक्ष को हलफनामा देने का निर्देश दिया। इस पर पक्षकार के वकील रोहन कामा ने कहा, सीलबंद लिफाफे में पेश सामग्री में कुछ संवेदनशील जानकारियां हैं, जो प्रेस के पास पहुंच सकती हैं। जस्टिस पटेल ने यह दलील खारिज करते हुए कहा, प्रेस की आजादी के अधिकारों को न तो मैं कम कर सकता हूं और न ऐसा करूंगा। मैं नहीं मानता कि प्रेस का हमेशा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार रहता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई पांच अक्तूबर को होगी।