पीठ ने कहा कि बीते दशकों में सरकार ने कई समाज सुधारकों द्वारा लिखी सामग्री को शानदार ढंग से छापा है। लेकिन इसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार समय के अनुसार अपनी सोच बदले और डॉ. अंबेडकर व अन्य समाज सुधारकों के लेखन के बारे में आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाए। प्रदेश सरकार ने पिछले साल दिसंबर में डॉ. अंबेडकर का लेखन छापने का प्रोजेक्ट बंद कर दिया था। मामले का स्वतः संज्ञान लेकर हाईकोर्ट सुनवाई कर रही है। उसने सरकार को दो हफ्ते में अपना जवाब रखने को कहा है।
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जस्टिस प्रसन्न वराळे और जस्टिस किशोर संत ने कहा कि बीते दशकों में सरकार ने कई समाज सुधारकों द्वारा लिखी सामग्री को शानदार ढंग से छापा है। लेकिन इसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। पहले पाठक खुद किताबों की दुकानों तक आते थे, आज उन्हें लाना पड़ता है। कई लोगों को तो पता भी नहीं कि सरकार की किताबों की दुकान कहां है?
सरकार के जवाब से नाखुश
सरकार ने बताया कि यह किताबें स्कूल-कॉलेजों में बांटी जा रही है। इस पर हाईकोर्ट ने नाखुशी जताकर कहा कि इस काम के लिए एक समिति बनती है। अगर यह बनी है तो इसमें कौन लोग हैं, यह सरकार ने नहीं बताया। समय पर किताबें छापने के लिए क्या कदम उठाएं, यह भी समिति बताती है।