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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा: सिर्फ अनिल देशमुख ही नहीं, सबकी जांच करना सीबीआई का दायित्व

Mon, 05 Jul 2021 06:30 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, मुंबई।

सार

बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह सीबीआई का कर्तव्य है कि वह न केवल महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की बल्कि उनसे जुड़े मामले में कथित रूप से भ्रष्टाचार में शामिल सभी लोगों की जांच करे।
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह सीबीआई का कर्तव्य है कि वह न केवल महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की बल्कि उनसे जुड़े मामले में कथित रूप से भ्रष्टाचार में शामिल सभी लोगों की जांच करे। अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता के खिलाफ चल रही जांच की प्रगति के बारे में भी बताने को कहा।

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न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एन जे जामदार की पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से पूछा कि अप्रैल में देशमुख के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच कितनी आगे बढ़ी है। पीठ ने कहा कि जांच की प्रगति क्या है? हम एक सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट देखना चाहते हैं।

पीठ राकांपा नेता द्वारा, 24 अप्रैल को भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप में सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय के निर्देश पर एजेंसी द्वारा प्रारंभिक जांच किए जाने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के बाद देशमुख ने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। 
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सीबीआई जांच एक वकील द्वारा मुंबई पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित है। इसमें मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा देशमुख के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उनके खिलाफ जांच का अनुरोध किया गया।

पूछा- याचिका पर सुनवाई करनी चाहिए?
जब देशमुख की ओर से वरिष्ठ वकील अमित देसाई सोमवार को बहस कर रहे थे तो पीठ ने सवाल किया कि क्या इस स्तर पर जब जांच अभी भी चल रही है, तब अदालत को मामले को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करनी चाहिए?

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद प्रारंभिक जांच शुरू की गई और प्राथमिकी दर्ज की गई। सीबीआई की यह जिम्मेदारी है कि वह इसमें शामिल सभी लोगों की जांच करे। केवल याचिकाकर्ता (देशमुख) की ही नहीं। इसमें वे लोग भी शामिल हो सकते हैं जो उस समिति में थे जिसने (पूर्व पुलिसकर्मी) सचिन वाजे को बहाल किया था।

वाजे जेल में बंद
वाजे इस समय 'एंटीलिया' के पास गाड़ी में मिले विस्फोटक और ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में जेल में बंद है। आरोप है कि देशमुख ने वाजे को मुंबई के बार और रेस्तरां से करोड़ों रुपये की वसूली करने को कहा था। वाजे को एंटीलिया-हिरन मामले में गिरफ्तारी के बाद मई में पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 'प्रशासन में जनता का विश्वास पैदा करने के लिए' पांच अप्रैल के अपने आदेश में सीबीआई को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि इसलिए, यह केवल याचिकाकर्ता तक ही सीमित नहीं है बल्कि उन सभी लोगों के लिए है जो प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों में शामिल हैं।

पीठ ने सीबीआई से यह भी जानना चाहा कि प्राथमिकी के आरोपी कॉलम में शामिल 'अज्ञात' व्यक्ति कौन थे। अदालत ने कहा कि चोरी और लूट के मामलों में आरोपी कॉलम में अमूमन अज्ञात व्यक्ति होते हैं। लेकिन इस मामले में प्रारंभिक जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने उच्च न्यायालय से कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर इन बिंदुओं पर अदालत को अवगत कराएंगे। अदालत मामले में सात जुलाई को आगे की सुनवाई करेगी।

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एंटीलिया मामला: आरोपी ने इकबालिया बयान दर्ज कराया

वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने सोमवार को विशेष अदालत को बताया कि दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास एक एसयूवी मिलने और बाद में कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में गिरफ्तार मनीष सोनी ने एक मजिस्ट्रेट के सामने इकबालिया बयान दिया है। अंबानी के आवास के पास मिली गाड़ी में विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी।

अदालत को बताया गया कि हालांकि, मजिस्ट्रेट ने 'अनजाने' में आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सोनी को सोमवार को विशेष अदालत में पेश किया जाना था। सोनी के वकील राहुल अरोटे ने कहा कि हालांकि, सोनी को शाम साढ़े पांच बजे तक पेश नहीं किया जा सका। इसलिए उन्होंने (एनआईए ने) सोनी को न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए आवेदन किया क्योंकि आरोपी को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 (इकबालिया बयान) के तहत बयान दर्ज कराने के लिए एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। उन्हें गलत तरीके से जेल हिरासत में भेजा गया।

उन्होंने कहा कि यह अवैध है। हमने इसे अदालत के सामने रिकॉर्ड में रखा है कि उन्होंने (एनआईए) सोनी को पेश नहीं किया है और इसलिए उनकी (न्यायिक) हिरासत का अनुरोध नहीं कर सकते हैं। इससे पहले दिन में, एनआईए ने सोनी को विशेष अदालत के समक्ष पेश नहीं किया। जांच एजेंसी ने इसके बजाय अदालत को बताया कि आरोपी को बयान दर्ज करने के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। एनआईए ने आगे कहा कि मजिस्ट्रेट ने सोनी का बयान दर्ज करने के बाद 'अनजाने' में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सोनी और सतीश मोथकुरी को 17 जून को पूर्व 'मुठभेड़ विशेषज्ञ' पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा के साथ गिरफ्तार किया गया था। विशेष अदालत ने दोनों को पांच जुलाई तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया। इस साल 25 फरवरी को अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास 'एंटीलिया' के पास एसयूवी बरामद की गयी थी। हिरन मार्च में ठाणे जिले में मृत पाया गया था।
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