एक मामले में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि सिर्फ RT-PCR रिपोर्ट नेगेटिव होने से कोरोना मुआवजा रोका नहीं जा सकता। अगर अन्य मेडिकल दस्तावेज संक्रमण और मौत की पुष्टि करते हैं, तो परिवार मुआवजे का हकदार होगा।
कोरोना काल में जान गंवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि सिर्फ आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव होने के आधार पर कोरोना से मौत का मुआवजा खारिज नहीं किया जा सकता। अगर अन्य मेडिकल रिपोर्ट साफ तौर पर संक्रमण और उससे हुई मौत की पुष्टि करती हैं, तो मुआवजा देना होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला उस नर्स के मामले में आया है, जिसकी ड्यूटी के दौरान कोरोना से मौत हुई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से उसके परिवार को मुआवजा नहीं मिल रहा था।
गायकवाड़ ने मुआवजे के लिए किया था आवेदन
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आरटी-पीसीआर को आधार मानना गलत
अदालत ने यह भी कहा कि कई मामलों में आरटी-पीसीआर रिपोर्ट गलत आ सकती है, इसलिए उसे ही एकमात्र आधार मानना गलत होगा। जब अन्य मेडिकल सबूत यह साबित करते हैं कि मौत कोरोना की वजह से हुई, तो मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह गायकवाड़ का दावा आगे संबंधित विभाग को भेजें और यह मानकर चलें कि उनकी पत्नी की मौत कोरोना संक्रमण से हुई थी।
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मृत नर्स कोरोना काल में क्वारंटीन सेंटर में तैनात थीं और सीधे तौर पर कोरोना मरीजों के संपर्क में थीं। इस फैसले को उन हजारों स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जिनके मुआवजे केवल तकनीकी कारणों से रोके गए थे।