पीठ ने मोहम्मद यूसुफ नामक व्यक्ति की याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसने उसके बेटे शाहबाज अहमद को नासिक जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी जुलाई 2024 के हिरासत आदेश को चुनौती दी थी।
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक आरोपी को हिरासत में रखने के आदेश को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय का कहना है कि आरोपी को गवाहों के बयानों की प्रति ऊर्दू भाषा में नहीं दी गई, जबकि वह ऊर्दू भाषा ही ठीक से जानता है। ऐसे में आरोपी के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। इस आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हुई है। जस्टिस सारंग कोटवाल और एसएम मोदक की खंडपीठ ने 21 मार्च को दिए अपने फैसले में कहा कि चूंकि गवाहों के बयान उस भाषा में नहीं दिए, जिसमें आरोपी पारंगत है। इसके चलते वह हिरासत आदेश को चुनौती नहीं दे सका। पीठ ने मोहम्मद यूसुफ नामक व्यक्ति की याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसने उसके बेटे शाहबाज अहमद को नासिक जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी जुलाई 2024 के हिरासत आदेश को चुनौती दी थी।
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क्या कहा उच्च न्यायालय ने
उच्च न्यायालय ने आरोपी को राहत देते हुए उसके हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि हिरासत आदेश पारित करने से पहले गवाहों के बयानों सहित पूरी कार्यवाही मराठी में हुई थी। शाहबाज को हिरासत आदेश का उर्दू अनुवाद सौंपा गया था, लेकिन गवाहों के बयान उर्दू अनुवाद में पेश नहीं किए गए थे। अदालत ने कहा कि हिरासत आदेश को चुनौती देने के लिए उसे प्रतिनिधित्व से ही वंचित कर दिया गया, इससे संविधान के तहत उसके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए।