बॉम्बे हाई कोर्ट ने डॉक्टर संग्राम पाटिल की याचिका पर मुंबई पुलिस से जवाब मांगा है। पाटिल पर बीजेपी नेताओं के खिलाफ पोस्ट करने का केस है और उन्हें देश छोड़ने से रोका गया है। उन्होंने अदालत में केस रद्द करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई चार फरवरी को होगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को मुंबई पुलिस को नोटिस जारी किया है। यह मामला यूनाइटेड किंगडम (यूके) में रहने वाले डॉक्टर और यूट्यूबर संग्राम पाटिल की याचिका से जुड़ा है। उन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। पाटिल ने कोर्ट से अपील की है कि उनके खिलाफ दर्ज केस को रद्द मांग की है।
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अपनी याचिका में पाटिल ने पुलिस की ओर से जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) को भी खत्म करने की मांग की है। पाटिल के वकील सुदीप पासबोला ने जस्टिस अश्विन भोबे की सिंगल बेंच को बताया कि डॉक्टर को अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर की जानकारी नहीं थी। वह अपनी मर्जी से यूके से भारत आए थे। दूसरी तरफ, एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने कोर्ट को बताया कि पाटिल पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं।
अदालत ने पुलिस को नोटिस जारी करते हुए याचिका के जवाब में एक एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को तय की गई है। याचिका के मुताबिक, 19 जनवरी को एलओसी के आधार पर पाटिल को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोक लिया गया था। उन्हें देश छोड़ने की इजाजत नहीं मिली।
पाटिल ने अपनी याचिका में कहा है कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह अब तक तीन बार पूछताछ के लिए पेश हो चुके हैं। भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक और जलगांव जिले के रहने वाले पाटिल को सबसे पहले दस जनवरी को मुंबई एयरपोर्ट पर रोका गया था। उस समय वह भारत आए थे और अधिकारियों ने उनसे करीब 15 घंटे तक पूछताछ की थी।
इसके बाद 16 जनवरी को उन्हें फिर से हिरासत में लिया गया, जब उन्हें मैनचेस्टर के लिए उड़ान भरनी थी। उन्हें देश से बाहर जाने नहीं दिया गया। पाटिल के खिलाफ एफआईआर पिछले साल दिसंबर में दर्ज की गई थी। यह शिकायत महाराष्ट्र बीजेपी के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर निखिल भामरे ने की थी। भामरे ने पुलिस को बताया कि ऑनलाइन ब्राउज करते समय उन्हें पाटिल की पोस्ट मिली थी, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।