अध्यात्मिक गुरु ओशो की वसीयत में कथित फर्जीवाडे़ के आरोपों की जांच को लेकर बांबे हाईकोर्ट ने पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले में पेश की गई जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट अदालत ने कहा कि यदि अगली सुनवाई के दौरान जांच में प्रगति नहीं दिखाई दी तो मामले की जांच सीबीआई को सौंप देंगे।
न्यायमूर्ति आरएम सावंत व न्यायमूर्ति रेवती मोहिते ढेरे की खंडपीठ ने कहा कि हमारे पिछले आदेश के तहत जांच की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। जांच की प्रगति से असंतुष्ट खंडपीठ ने 12 जुलाई को मामले की जांच से जुड़ी जांच अधिकारी को भी कोर्ट में उपस्थित रहने को कहा है। खंडपीठ ने कहा कि हम पुलिस की मौजूदा जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। इसमें पुलिस की जांच के संबंध में विस्तृत ब्यौरा नहीं है। हम नहीं चाहते कि पुलिस आरोपियों को सवाल भेजकर आरोपियों के जवाब का इंतजार करे। गौरतलब है कि पुणे निवासी व ओशो भक्त योगेश ठक्कर ने वसीयत में ओशो के फर्जी हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। उन्होंने ओशो फाउंडेशन के ट्रस्टियों के खिलाफ जांच की मांग की है।