पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल ने सजा के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पूर्व सैन्य अफसर को 11 साल की एक लड़की से बुरे स्पर्श के मामले में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता आरोपी के बुरे स्पर्श के बारे में अच्छे से जानती थी। लिहाजा, पूर्व सैन्य अधिकारी की सजा रद्द नहीं की जाएगी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक पूर्व सैन्य अफसर की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा, एक नाबालिग लड़की बैड टच (खराब नियत से स्पर्श) व गुड टच (अच्छे नियत से स्पर्श) को अच्छे से जानती है। नाबालिग जानती है कि सामने वाला उसे किस नियत से स्पर्श कर रहा है।
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पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल ने सजा के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पूर्व सैन्य अफसर को 11 साल की एक लड़की से बुरे स्पर्श के मामले में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता आरोपी के बुरे स्पर्श के बारे में अच्छे से जानती थी। लिहाजा, पूर्व सैन्य अधिकारी की सजा रद्द नहीं की जाएगी। जस्टिस रेवती मोहित डेरे और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने कहा, नाबालिग लड़की ने अपने पिता के कमरे से चले जाने के बाद आरोपी ने उसके साथ जिस तरह से व्यवहार किया, अदालत में उसके बारे में अच्छे से बताया है।
पांच साल की मिली है सजा
नाबालिग लड़की के यौन शोषण मामले में मार्च, 2021 में सेना के जनरल कोर्ट मार्शल ने पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल को पॉक्सो कानून के तहत दोषी ठहराते हुए पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। जीसीएम के इस फैसले को पूर्व सैन्य अफसर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।