बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह राज्य के आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करे। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने 2007 में दायर की गईं कई जनहित याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान राज्य के मेलघाट क्षेत्र में कुपोषण के कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं की मौत के मामले अधिक होने का उल्लेख किया।
अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार के संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। अदालत के आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हुई। पीठ ने कहा, आदिवासी समुदाय के सर्वोत्तम हित को बढ़ावा देने के मद्देनजर इन सभी विभागों को एकजुट होकर कार्य करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। पीठ ने सरकार को सुझावों के क्रियान्वयन एवं संबंधित प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्ट 11 अगस्त को दाखिल करने का निर्देश दिया।
जाह्नवी कुकरेजा हत्याकांड पर बड़ा अपडेट
वहीं, दोस्तों के साथ नए साल का जश्न मनाने गई जाह्नवी कुकरेजा (19) की हत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी श्री जोगधनकर को जमानत देने से इनकार कर दिया। उपनगर खार स्थित एक इमारत की सीढ़ियों पर जाह्नवी को 1 जनवरी 2021 को मृत पाया गया था।
जस्टिस भारती डांगरे की एक सदस्यीय पीठ के फैसले के मुताबिक, प्रथम दृष्टया आरोपी जोगधनकर के अपराध में शामिल होने के सबूत मिलते हैं। फैसले में जज ने कहा, नया साल सपनों को हकीकत में बदलने का मौका लाता है। यह ऐसा है, जैसे किताब में एक नया अध्याय लिखे जाने का इंतजार कर रहा है।
इस मौके पर श्री ने खुद को दलदल में फंसा लिया। कोर्ट ने आदेश में कहा, तीन करीबी दोस्त जाह्नवी, श्री और दिया नए साल पर जश्न मनाने गए थे। किसी बात पर विवाद हुआ और दो ने मिलकर जाह्नवी को बुरी तरह पीटा। उसे आठवीं मंजिल से घसीटकर दूसरी मंजिल पर ले गया गया। कोर्ट ने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई।